रीवा-मऊगंज: नियमों को ठेंगा दिखा रही परिवहन विभाग की अनधिकृत चेक पोस्टें, सवालों के घेरे में अधिकारी और प्रशासन
(विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश )
रीवा-मऊगंज जिले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट निर्देश के बाद भी परिवहन विभाग की चेक पोस्टें नियम विरुद्ध सक्रिय हो गई हैं। इन चेक पोस्टों पर सुहागी पहाड़ और हनुमान चौकिया जैसे स्थानों पर 24 घंटे अवैध वसूली की खबरें सामने आ रही हैं। यह मामला न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का एक नया अध्याय भी उजागर करता है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि सभी चेक पोस्टों को बंद किया जाए, ताकि जनता को अनावश्यक परेशानी और भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल सके। लेकिन, रीवा संभाग में इन आदेशों की अनदेखी करते हुए चेक पोस्टों को दोबारा चालू कर दिया गया। सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के आदेशों के बावजूद इन चेक पोस्टों को कौन संचालित कर रहा है और किसके संरक्षण में यह सब हो रहा है?
खाकी वर्दी में कौन?
चेक पोस्टों पर खाकी वर्दी में तैनात लोग दिखते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे परिवहन विभाग के अधिकृत कर्मचारी हैं या अनधिकृत व्यक्ति। यदि ये अनाधिकृत लोग हैं, तो संबंधित थाना क्षेत्र और जिले के पुलिस अधीक्षक इस पर क्या कदम उठा रहे हैं?
टूरिस्ट परमिट और ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली
चेक पोस्टों पर टूरिस्ट परमिट और ओवरलोड वाहनों से अवैध सेवा शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह अवैध कमाई करोड़ों रुपये प्रतिमाह तक पहुंच रही है। यह धनराशि किनकी जेबों में जा रही है और इस पूरे नेटवर्क को कौन चला रहा है, यह जांच का विषय है।
आरटीओ कार्यालय में अनियमितताएं
रीवा आरटीओ कार्यालय में भी कई अनधिकृत व्यक्तियों के कार्यरत होने की खबरें हैं। सूत्रों के अनुसार, इन व्यक्तियों को किसी अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। इनकी नियुक्ति किस आधार पर की गई और क्या इनकी गतिविधियां विभागीय अधिकारियों की जानकारी में हैं? यह एक बड़ा सवाल है।
संपत्ति में असामान्य वृद्धि
सूत्रों का यह भी दावा है कि परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति में अचानक भारी वृद्धि हुई है। इस संपत्ति का स्रोत और इसमें अनधिकृत व्यक्तियों की भूमिका की जांच की आवश्यकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
प्रदेश के मुखिया से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दें और एक व्यापक जांच अभियान चलाकर दोषियों को चिन्हित करें। यदि प्रदेश भर में ऐसी गतिविधियों की जांच की जाए, तो कई बड़े रहस्य सामने आ सकते हैं।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
जब इस मामले पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो अधिकांश ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क संभव नहीं हो सका। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इन चेक पोस्टों पर तैनात लोग अधिकृत हैं या अनधिकृत।
जनता में आक्रोश और प्रशासन की चुप्पी
रीवा-मऊगंज की जनता इस स्थिति को लेकर बेहद नाराज है। मुख्यमंत्री के आदेशों के बावजूद चेक पोस्टों का संचालन एक गंभीर मुद्दा है। क्या जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक इस पर ध्यान देंगे? या यह मामला भी अन्य भ्रष्टाचार के मामलों की तरह जांच और फाइलों तक सीमित रह जाएगा?
यह मामला न केवल भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन और शासन के आदेशों की अवहेलना का भी प्रतीक है। यदि समय रहते इन चेक पोस्टों को बंद कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं का बड़ा उदाहरण बन जाएगा। जनता को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारी इस मामले में कठोर कदम उठाएंगे और दोषियों को न्याय के कठघरे में लाएंगे।



