रीवा: गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर बवाल, कलेक्ट्रेट परिसर में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने किया घेराव
(विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश )
रीवा, मध्यप्रदेश – डॉ. भीमराव आंबेडकर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में दिए गए विवादित बयान के खिलाफ आज रीवा जिले में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। 24 दिसंबर 2024 को दोपहर 3 बजे, सैकड़ों प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर में जुटे और घेराव कर गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग की। नारेबाजी और ज्ञापन सौंपने के साथ, प्रदर्शनकारियों ने आंबेडकर के प्रति अपमानजनक बयान पर माफी की मांग की।
रीवा जिले में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अन्य संगठनों के बैनर तले भारी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे और गृह मंत्री के बयान की निंदा करते हुए नारे लगाए। उनका कहना था कि अमित शाह ने संसद में डॉ. आंबेडकर पर विवादित टिप्पणी कर न केवल दलित समाज को, बल्कि पूरे देश को आहत किया है।
मुख्य मांगे
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मुख्य मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा:
1. अमित शाह को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
2. सार्वजनिक रूप से डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रति अपमानजनक बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।
3. दलित समाज के आत्मसम्मान के खिलाफ किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
बसपा का देशव्यापी आंदोलन
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने कहा,
"डॉ. आंबेडकर केवल एक महापुरुष नहीं हैं, वे दलित, वंचित और उपेक्षित समाज के आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रतीक हैं। संविधान को लिखकर उन्होंने इन वर्गों को कानूनी हक और स्वाभिमान दिया है। अमित शाह का यह बयान न केवल अपमानजनक है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ भी है।"
उन्होंने आगे कहा कि यदि भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां डॉ. आंबेडकर का सम्मान नहीं कर सकतीं, तो कम से कम उनका अनादर भी न करें।
रीवा में विरोध प्रदर्शन का माहौल
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शनकारियों ने जोश और गुस्से के साथ नारेबाजी की। बसपा के कार्यकर्ता, दलित संगठन, और विभिन्न सामाजिक समूहों ने मिलकर इस आंदोलन को मजबूती दी। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपा और गृह मंत्री अमित शाह के बयान की कड़ी निंदा की।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैनात रही।
मायावती ने कहा,
"बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर हमारे संविधान के रचयिता हैं। उन्होंने दलित, वंचित और उपेक्षित समाज के लिए जो योगदान दिया है, वह अद्वितीय है। अमित शाह द्वारा उनके खिलाफ अपमानजनक बयान देना पूरे समाज के लिए अस्वीकार्य है। इससे पूरे देश के लोग आहत और आक्रोशित हैं। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक गृह मंत्री इस्तीफा नहीं देते और माफी नहीं मांगते।"
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आंदोलन का प्रभाव
गृह मंत्री के बयान ने सियासी हलकों में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले ही भाजपा पर हमलावर हैं। अब मायावती के नेतृत्व में बसपा का देशव्यापी आंदोलन इस मामले को और अधिक तूल दे सकता है।
रीवा जिले का यह विरोध प्रदर्शन इस आंदोलन का एक अहम हिस्सा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमित शाह ने अपने बयान पर माफी नहीं मांगी, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप से फैल सकता है।
रीवा कलेक्ट्रेट परिसर में सैकड़ों लोगों का यह प्रदर्शन न केवल आंबेडकर के सम्मान की रक्षा का संदेश देता है, बल्कि देशभर में राजनीतिक हलचल को और तेज कर सकता है। प्रदर्शनकारियों का आक्रोश इस बात का प्रमाण है कि डॉ. आंबेडकर की छवि पर किसी भी प्रकार का आघात अस्वीकार्य है। अब देखना यह है कि अमित शाह और केंद्र सरकार इस विरोध का क्या जवाब देती है और विपक्ष इसे किस हद तक भुनाता है।



