मध्यप्रदेश रीवा - धान खरीदी में भारी अव्यवस्था: उठाव में देरी से करोड़ों का धान खतरे में
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा
रीवा। मध्य प्रदेश सरकार की धान खरीदी योजना इस बार गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार हो गई है। जिले में खरीदी केंद्रों पर बड़ी मात्रा में धान डंप पड़ा है, जिसे सुरक्षित रखना चुनौती बन गया है। बारिश और जलभराव के कारण यह धान खराब होने की कगार पर है। किसानों की मेहनत का यह धान प्रशासनिक लापरवाही के चलते बर्बादी की ओर बढ़ रहा है।
प्रारंभिक तैयारियों के बावजूद उठाव में फेल
रीवा जिले की कलेक्टर प्रतिभा पाल ने खरीदी शुरू होने से पहले बारदाने की आपूर्ति और धान उठाव को प्राथमिकता दी थी। बारदाने की व्यवस्था तो संतोषजनक दिख रही है, लेकिन धान के उठाव में भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। 2 दिसंबर 2024 से शुरू हुई खरीदी प्रक्रिया में 23 दिसंबर तक भी अधिकांश केंद्रों पर धान का उठाव नहीं हो पाया है।
कई केंद्रों पर धान से भरे ट्रक खड़े हैं, लेकिन सही समन्वय और योजना के अभाव में ये आगे नहीं बढ़ पा रहे। केंद्रों पर जगह की कमी से धान खुले में पड़ा है, जिससे इसे सुरक्षित रखना लगभग असंभव हो गया है। बारिश का पानी प्लास्टिक शीट से रोका जा सकता है, लेकिन जमीन से आने वाले पानी को रोकना मुश्किल हो रहा है। इससे करोड़ों रुपये की धान बर्बादी की आशंका बढ़ गई है।
प्रशासनिक लापरवाही उजागर
इस स्थिति को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के जिला महाप्रबंधक पियूष माली से बात की गई। उन्होंने कहा कि उठाव कार्य शुरू हो गया है और समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन सड़कों पर खड़े ट्रक और ट्रैक्टरों की लंबी कतारें प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं।
प्रभावित केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें हैं, और वाहनों को खड़ा करने के लिए भी जगह नहीं है। धान खरीदी केंद्रों पर तलाई जैसी स्थिति बन गई है। इससे स्पष्ट है कि समुचित व्यवस्था के अभाव में स्थिति बिगड़ रही है।
किसानों में बढ़ता आक्रोश
धान उठाव में देरी से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग, और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक समाधान नहीं मिल पा रहा।
केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों की स्थिति भी दयनीय है। विभागों के बीच समन्वय की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता से कर्मचारियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी योजनाओं पर सवालिया निशान
मध्य प्रदेश सरकार की धान खरीदी योजना रीवा और मऊगंज में पूरी तरह से अव्यवस्था की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। किसानों को उचित व्यवस्था न मिलने से सरकार की योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यदि समय पर उठाव नहीं हुआ, तो भारी मात्रा में धान बर्बाद हो सकता है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा। क्योंकि अगर उठाव कराने में देर होगी तो किसानों का पैसा भी लेट से आयेगा यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी इंगित करती है कि सरकार की योजनाएं धरातल पर कारगर साबित नहीं हो रही हैं।
आगे का रास्ता
अब देखना यह है कि प्रशासन इस संकट से कैसे निपटता है। क्या समय पर उठाव करके धान को सुरक्षित रखा जा सकेगा, या फिर यह किसानों और सरकार दोनों के लिए बड़ी असफलता का कारण बनेगा? किसानों और केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को प्रशासन से तत्काल राहत की उम्मीद है।


