लापरवाही की भेंट चढ़ी करोड़ों की धान, प्रशासनिक अव्यवस्था उजागर
रीवा और मऊगंज जिले के खरीदी केंद्रों में प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा करोड़ों की धान के भीगने के रूप में सामने आया है। जिले में धान की खरीदी का कार्य जारी है, लेकिन बारिश की पूर्व चेतावनी के बावजूद धान की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए। खुले आसमान के नीचे रखी गई धान आज की बारिश में पूरी तरह पानी-पानी हो गई, जिससे किसानों की मेहनत और सरकारी धन का बड़ा नुकसान हुआ है।
लापरवाही के कारण बर्बाद हो रही धान
खरीदी केंद्रों पर धान सुरक्षित रखने के लिए पहले ही सावधानी बरतने की जरूरत थी। समाचार पत्र विंध्य वसुंधरा ने इस मुद्दे को पहले ही उठाते हुए प्रशासन को चेताया था कि मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई है। इसके बावजूद, प्रशासन की उदासीनता के कारण धान की बोरियां खुले में पड़ी रहीं।
आज हुई बारिश ने प्रशासनिक अव्यवस्था की पोल खोल दी। कई स्थानों पर धान के बोरों को ढकने का प्रयास तो किया गया, लेकिन पानी जमीन में भरने से नीचे से धान भीग गई। स्थिति यह है कि खरीदी केंद्रों पर रखी धान नष्ट होने के कगार पर है।
घोषणाओं तक सीमित प्रशासनिक कार्रवाई
प्रशासन ने सभी खरीदी केंद्रों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए थे, लेकिन वास्तविकता में इनका पालन नहीं किया गया। अधिकांश केंद्रों पर धान की सुरक्षा के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं दिखा। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
ओपन खरीदी केंद्रों में गंभीर हालात
रीवा और मऊगंज जिले के कई ओपन खरीदी केंद्रों पर धान खुले मैदान में रखी गई। चिल्ल, बंधवा, बहुती, जोधपुर और अन्य स्थानों पर बारिश के कारण धान की बोरियां पानी में डूबी हुई पाई गईं। न तो पानी की निकासी का इंतजाम था और न ही धान को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था।
समय पर उठाव न होने से नुकसान
धान का समय पर उठाव न होना भी समस्या को और बढ़ा रहा है। ट्रांसपोर्टरों की लापरवाही से केंद्रों पर धान का अंबार लग गया है। पर्याप्त संसाधन और प्रबंधन के अभाव में किसानों की मेहनत बेकार हो रही है।
जिम्मेदार अधिकारियों का बयान
इस मामले में नागरिक आपूर्ति निगम के जिला महाप्रबंधक पीयूष माली का कहना है, "हमें अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि कितनी मात्रा में धान भीगी है। समितियों और स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।"
किसानों की मेहनत पर पानी
धान भीगने से न केवल सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि किसानों को भी भुगतान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत कार्रवाई कर नुकसान की भरपाई के उपाय करे और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो, इसके लिए पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करे।


