रीवा मध्यप्रदेश : गर्भवती महिला को लेकर भिड़ीं आशा कार्यकर्ता, ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा
रीवा जिले के गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 18 दिसंबर 2024 को स्वास्थ्य विभाग की दो आशा कार्यकर्ताओं के बीच गर्भवती महिला को लेकर तीखी झड़प हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
घटना का कारण
गर्भवती महिलाओं की देखभाल और उनके सुरक्षित प्रसव की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं पर होती है। इसके तहत उन्हें प्रोत्साहन राशि और मानदेय दिया जाता है। इसी प्रोत्साहन राशि को लेकर दोनों आशा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ। दोनों ने महिला को अपने खाते में जोड़ने की कोशिश की, ताकि वे अपनी सेवाओं के आधार पर लाभ प्राप्त कर सकें।
वायरल वीडियो में क्या है?
घटना का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसमें दोनों आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिला को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करती नजर आ रही हैं कि वे उसकी अच्छी देखभाल करेंगी। एक कार्यकर्ता महिला को फोन पर समझाने की कोशिश करती है, जबकि दूसरी महिला भी अपना पक्ष मजबूत करने के लिए हस्तक्षेप करती है। यह विवाद धीरे-धीरे तीखा हो गया, और वहां मौजूद लोग तमाशबीन बनकर यह सब देखते रहे।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रभाव
यह घटना केवल दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में गहराई से मौजूद खामियों को उजागर करती है। आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं का आधार मानी जाती हैं, लेकिन मानदेय प्रणाली और संसाधनों की कमी के कारण उनके बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना पर कोई बयान नहीं दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी स्थितियां उत्पन्न न हों।
आगे की राह
नीतिगत सुधार: आशा कार्यकर्ताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को कम करने के लिए मानदेय प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण और जागरूकता: कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारियों और व्यवहार प्रबंधन को लेकर नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
मरीजों की प्राथमिकता: स्वास्थ्य सेवाओं का मूल उद्देश्य मरीजों की भलाई होना चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी विवाद का असर मरीजों पर न पड़े।
यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंदों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।


