रीवा जिले में सट्टा और नशे का कारोबार: एक गंभीर समस्या
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा
रीवा जिला, जो वर्तमान में दो प्रशासनिक इकाइयों, रीवा और मऊगंज में विभक्त है, नशे और सट्टा कारोबार के कारण तेजी से चर्चा में है। यह गंभीर समस्या जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और पुलिस के गठजोड़ के कारण फल-फूल रही है। जिले में दारू, गांजा, मेडिकल नशा (सिरप, गोली), और ब्राउन शुगर जैसे खतरनाक पदार्थों का व्यापार तेजी से बढ़ रहा है।
नशे के व्यापार का बढ़ता प्रभाव
1. दारू और गांजा
यह नशे का सबसे सामान्य रूप है, जिसमें आबकारी विभाग की मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गांजा जो ₹2,000 प्रति किलो आता है, गांवों में ₹50,000 प्रति किलो तक बिकता है।
2. मेडिकल नशा
दवा की दुकानों से सिरप और गोलियों की अवैध बिक्री ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता को दर्शाती है। निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन के कारण यह युवा पीढ़ी की शारीरिक क्षमताओं को बर्बाद कर रहा है।
3. ब्राउन शुगर
यह सबसे खतरनाक नशा है, जो रीवा की युवा पीढ़ी को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। यह नशा माफिया स्थानीय पुलिस और राजनेताओं के संरक्षण में काम कर रहे हैं।
गठजोड़ और सामाजिक नुकसान
रीवा जिले में नशे के व्यापार की सफलता के पीछे कई कारण हैं:
जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूलकर इस अवैध व्यापार को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
स्थानीय पुलिस और थाने के प्रभारी अधिकारी माफियाओं से सांठगांठ कर व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं।
राजनेताओं की मदद से नशे के कारोबारी बचाव में लगे रहते हैं।
नशे का प्रभाव और आर्थिक गणित
नशे के कारोबार से जुड़े व्यक्ति प्रतिदिन ₹2,000 से ₹3,000 तक कमा रहे हैं।
हर महीने करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार हो रहा है, जो समाज और सरकार को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।
इस काली कमाई से संपत्तियां अर्जित की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही।
समाज के लिए खतरा
यदि यह समस्या समय रहते नहीं रोकी गई, तो यह महामारी का रूप ले सकती है। यह नशा महामारी गांवों और शहरों में कोरोना काल से भी भयावह साबित हो सकती है। बेरोजगार युवा इसमें शामिल होकर अपने जीवन को बर्बाद कर रहे हैं।
सरकार की भूमिका और समाधान की जरूरत
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और क्षेत्र के प्रमुख नेताओं को इस समस्या की गंभीरता को समझना होगा।
सख्त कानून और निगरानी
अवैध कारोबार को रोकने के लिए सख्त कानूनों का पालन और नियमित जांच आवश्यक है।
जनजागरूकता अभियान
नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जनता को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है।
जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही
नेताओं और अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाए, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।
रीवा जिले में नशे और सट्टे का बढ़ता कारोबार समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है। यदि इसे समय रहते नहीं रोका गया, तो यह क्षेत्र और देश के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। सरकार और प्रशासन को इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम उठाने होंगे।


