रीवा-मऊगंज परिवहन विभाग में अनियमितताएं: निजी हाथों में संचालन, भ्रष्टाचार पर उठे सवाल
रीवा, 20 जनवरी 2025: रीवा और मऊगंज जिले में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विभाग में वर्षों से व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार ने शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व से वंचित कर दिया है, वहीं आम जनता को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विभाग में नियमित सरकारी कर्मचारियों की कमी के चलते निजी व्यक्तियों के हाथों कार्यभार सौंपा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
निजी हाथों में संचालन: पारदर्शिता पर उठे सवाल
रीवा और मऊगंज में परिवहन विभाग के उड़नदस्ता दल से लेकर कार्यालयों तक कई महत्वपूर्ण पदों पर निजी व्यक्तियों की नियुक्ति की जा रही है। इन्हें 5,000 रुपये से 30,000 रुपये तक मासिक वेतन दिया जाता है, लेकिन इनके पास कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं हैं। इसके बावजूद, ये निजी कर्मचारी महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है।
मुख्य अनियमितताएं एवं भ्रष्टाचार के प्रमुख पहलू
1. अवैध बस संचालन और परमिट दुरुपयोग:
रीवा जिले में परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण एक ही परमिट पर कई बसों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बिना वैध परमिट के सैकड़ों बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। विभाग की मिलीभगत से टूरिस्ट बसों को व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है।
2. स्कूल वाहनों में सुरक्षा की अनदेखी:
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूली वाहनों में जरूरत से ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा है। कई वाहनों में अनधिकृत तरीके से सीटों में बदलाव किया गया है, जिससे सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
3. अनधिकृत व्यावसायिक वाहन संचालन:
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भारी संख्या में वाहन बिना विभागीय स्वीकृति के व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाए जा रहे हैं। बिना पंजीकरण के ट्रक, जेसीबी और अन्य वाहन अवैध खनन कार्यों में संलग्न हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
4. पुरानी गाड़ियों का अवैध उपयोग:
परिवहन विभाग की लापरवाही से फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं। पुराने वाहन सस्ते दामों पर बेचकर ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
5. भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण:
सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग के कई अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, जिसमें ट्रांसपोर्ट परमिट में धांधली और अवैध वसूली शामिल हैं। ‘सेवा शुल्क’ के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है, और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
सोहागी पहाड़ आरटीओ चेक पोस्ट: अवैध वसूली का गढ़
हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने सभी आरटीओ चेक पोस्ट बंद करने के आदेश दिए हैं, लेकिन रीवा जिले के सोहागी पहाड़ आरटीओ चेक पोस्ट पर अवैध वसूली का खेल बदस्तूर जारी है। ट्रकों और बसों से अवैध तरीके से धन उगाही की जा रही है। ट्रांसपोर्टर्स ने कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए आवश्यक समाधान और कदम
1. नियमित सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति:
निजी व्यक्तियों की जगह विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
2. कड़ी जांच और दंड:
अवैध परिवहन और परमिट घोटालों की जांच की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
3. ट्रांसपोर्टर्स से सीधा संवाद:
परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाया जाए ताकि भ्रष्टाचार की शिकायतें सीधे प्रशासन तक पहुंचें।
4. स्कूल वाहनों की सुरक्षा:
सभी स्कूली वाहनों में जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता की जाए और नियमित फिटनेस जांच सुनिश्चित हो।
5. अवैध खनन पर रोक:
सभी व्यावसायिक वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर अवैध खनन गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
सरकार के आदेशों का उल्लंघन
मध्य प्रदेश सरकार ने आरटीओ चेक पोस्ट को बंद करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन रीवा जिले एवं मऊगंज जिले में और सोहागी पहाड़ चेक पोस्टों और हनुमाना चेक पोस्ट पर अभी भी अवैध गतिविधियां जारी हैं। खाकी वर्दीधारी अधिकारी वाहनों की जांच के नाम पर अवैध उगाही कर रहे हैं। स्थानीय जनता इस लचर व्यवस्था से नाराज है और सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रही है।
जनता की मांग: कठोर कार्रवाई हो
रीवा और मऊगंज जिले की जनता अब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रही है। लोगों का कहना है कि यदि सरकार शीघ्र सख्त कार्रवाई नहीं करती है, तो इस भ्रष्टाचार से भविष्य में बड़े संकट उत्पन्न हो सकते हैं।
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