राष्ट्रीय राजमार्ग-27: गड्ढों में तब्दील सड़क बनी मौत का रास्ता, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी
गढ़ तहसील मंनगवा जिला (रीवा)। मध्यप्रदेश
रीवा जिले के मंनगवा तहसील के ग्राम पंचायत गढ़ से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-27 आज अपनी दुर्दशा के कारण चर्चा में है। यह मार्ग, जो जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर है, जर्जर हालत में होने के कारण दुर्घटनाओं का गढ़ बन चुका है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को प्रतिदिन जानलेवा जोखिम उठाना पड़ रहा है।
इस मार्ग का उपयोग बाजार, स्कूल, और अन्य जरूरतों के लिए ग्रामीणों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है। खासकर रविवार और बुधवार के साप्ताहिक बाजार में आवागमन बढ़ जाता है। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की लापरवाही से यह समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।
सड़क की दुर्दशा: दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण
गड्ढों से भरी इस सड़क पर यात्रा करना अब जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गड्ढों में वाहन कूदने से आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं।
सबसे अधिक प्रभावित महिलाएं और बच्चे हैं।
महिलाएं अक्सर सड़क पर वाहन से गिरकर चोटिल हो जाती हैं।
बच्चे स्कूल जाते समय गड्ढों और कीचड़ में गिरकर परेशान होते हैं।
वाहनों की स्थिति भी खराब: लगातार झटकों से वाहन चालकों के साथ-साथ उनके वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित होने के बाद भी सुध नहीं
यह सड़क वर्ष 2020 में राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित की गई थी। इसके बाद से इसकी मरम्मत की उम्मीदें बढ़ गई थीं। लेकिन, तीन साल बीत जाने के बावजूद मरम्मत का कोई काम शुरू नहीं हुआ। न तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और न ही लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस ओर ध्यान दिया।
विधायक और प्रशासन की निष्क्रियता
मंनगवा क्षेत्र के विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापत ने इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सड़क की मरम्मत का निर्देश दिया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
विधायक नरेंद्र प्रजापत ने हाल ही में यह भी कहा कि वे अब इस मुद्दे को संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर के सामने उठाएंगे। साथ ही, विधानसभा में प्रश्न उठाकर इस सड़क के निर्माण में हो रही देरी का जवाब मांगेंगे।
क्षेत्रीय नेताओं की अनदेखी, जनता में नाराजगी
मंगवा विधानसभा क्षेत्र के लिए यह स्थिति और भी निराशाजनक है क्योंकि यहां से तीन-तीन विधायकों का संबंध है।
1. गिरीश गौतम (विधानसभा अध्यक्ष)
2. नागेंद्र सिंह (पूर्व मंत्री)
3. प्रदीप पटेल (वरिष्ठ नेता)
इन तीनों का पैतृक गांव मंगवा विधानसभा क्षेत्र में ही है। जनता का कहना है कि क्षेत्र से जुड़े इतने वरिष्ठ नेताओं के बावजूद सड़क जैसी बुनियादी समस्या का हल न होना चिंताजनक है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अपने क्षेत्र की इस दयनीय स्थिति पर ये नेता ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो बाकी क्षेत्रों की क्या हालत होगी।
विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल
विपक्षी दल भी इस गंभीर समस्या को लेकर निष्क्रिय दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्रीय नेताओं ने न तो इसे जिला स्तर पर उठाया और न ही राज्य स्तर पर। जनता का कहना है कि विपक्ष को जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहिए था, लेकिन ऐसा न होने से उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय जनता की प्रमुख मांगें:
1. तत्काल मरम्मत कार्य: सड़क की मरम्मत का काम प्राथमिकता से शुरू किया जाए।
2. सुनवाई का आयोजन: संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर की उपस्थिति में जनसुनवाई हो।
3. विधानसभा में चर्चा: इस सड़क की स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही पर विधानसभा में प्रश्न उठाया जाए।
4. जिम्मेदारी तय हो: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पीडब्ल्यूडी को जवाबदेह बनाया जाए।
सरकार और प्रशासन पर उठ रहे सवाल
क्या तीन-तीन विधायकों के बावजूद मंगवा क्षेत्र अनाथ है?
राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित होने के बाद भी मरम्मत का कार्य क्यों नहीं शुरू हुआ?
जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता की सुरक्षा के प्रति गंभीर क्यों नहीं हैं?
जनता का आक्रोश और संभावित आंदोलन
क्षेत्र की जनता अब सब्र खो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। क्षेत्रीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता में बढ़ती नाराजगी सरकार के लिए भी चुनौती बन सकती है।
क्या गड्ढों से भरी यह सड़क कभी बनेगी सुरक्षित?
राष्ट्रीय राजमार्ग-27 की दुर्दशा और प्रशासन की अनदेखी से जनता अब उम्मीद लगाए बैठी है। क्या सरकार और जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे, या यह सड़क यूं ही गड्ढों में दबी रह जाएगी? इसका जवाब आने वाले समय में देखने को मिलेगा।

