जनता में गुस्सा: एक माह से जला पड़ा है ट्रांसफार्मर, बिजली विभाग ने नहीं ली सुध
मामला: रीवा जिले के त्यौंथर डिवीजन अंतर्गत लालगांव डीसी के ग्राम बांस का
रीवा जिले के त्यौंथर डिवीजन के ग्राम बांस के वार्ड नंबर 5 में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। यहां पिछले एक माह से 25 केवी का ट्रांसफार्मर जला हुआ पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग को इसकी जानकारी दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
आक्रोश में जनता, उम्मीदों का दामन थामे बैठी
वार्ड नंबर 5 की जनता बिजली की समस्या से बुरी तरह त्रस्त है। बिजली न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, व्यापारिक गतिविधियां ठप हैं, और गर्मी में लोग रातें अंधेरे में गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे ट्रांसफार्मर के पास खड़े होकर भीख की तरह बिजली की मांग करना उनके लिए शर्मनाक है, लेकिन और कोई चारा नहीं बचा है।
समस्या का मुख्य कारण: क्षमता से अधिक लोड
ग्रामीणों के मुताबिक, इस ट्रांसफार्मर पर क्षमता से अधिक लोड होने के कारण यह बार-बार जल जाता है। इसके बावजूद विभाग बार-बार 25 केवी का ही ट्रांसफार्मर लगाता है। ग्रामीणों ने बताया कि जब भी यह समस्या आती है, विभाग का जूनियर इंजीनियर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करता है, लेकिन हर बार वही जवाब मिलता है, "अभी 25 केवी का ट्रांसफार्मर लगा दो, अगली बार 63 केवी का लगाएंगे।"
सामाजिक कार्यकर्ताओं का हस्तक्षेप
सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र तिवारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्यौंथर डिवीजन के इंजीनियर ज्ञानेंद्र सिंह से चर्चा की। चर्चा के दौरान इंजीनियर ज्ञानेंद्र सिंह ने भरोसा दिलाया कि अगले एक-दो दिन में नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा।
ग्रामीणों की अपील: स्थायी समाधान हो
ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस बार समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उन्होंने मांग की है कि क्षमता के अनुसार 63 केवी का ट्रांसफार्मर लगाया जाए ताकि बार-बार इस समस्या का सामना न करना पड़े।
ग्रामीणों ने रखी अपनी पीड़ा
मीडिया के सामने अपनी परेशानी रखते हुए ग्रामीणों ने कहा कि बार-बार इस समस्या का सामना करना उनकी मजबूरी बन गई है। मुख्य रूप से राघवेंद्र तिवारी, हीरालाल जायसवाल, सुरेश सेन, राममणि प्रजापति समेत कई अन्य ग्रामीणों ने अपनी बातें रखते हुए कहा कि अगर विभाग इस बार भी असंवेदनशील रहा, तो आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
अंतिम उम्मीद: क्या वादा पूरा होगा?
अब देखने वाली बात यह है कि बिजली विभाग अपने वादे को कितनी गंभीरता से लेता है और ट्रांसफार्मर को कब तक बदलता है। क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि इस बार उनकी समस्या का समाधान होगा और उन्हें अंधेरे में नहीं छोड़ा जाएगा।
बिजली विभाग को इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए न केवल त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए बल्कि स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इससे न केवल ग्रामीणों की समस्याएं दूर होंगी, बल्कि विभाग की छवि भी सुधरेगी।


