श्रम न्यायालय ने 3 लाख रुपये मजदूरी विवाद में इंद्रजीत साकेत व अन्य का दावा किया खारिज
रीवा, 24 जनवरी 2025: श्रम न्यायालय रीवा के माननीय पीठासीन अधिकारी महोदय ने प्रकरण क्रमांक पी डब्ल्यू ए 194/2022 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए इंद्रजीत साकेत व अन्य 15 श्रमिकों द्वारा दायर दावा खारिज कर दिया है।
मामला ग्राम मलयगवां, तहसील मऊगंज, जिला मऊगंज, मध्य प्रदेश का था, जहां अनावेदक राम ललन तिवारी ने अपने मकान का निर्माण कार्य करवाया था। आवेदकों, जिनमें इंद्रजीत साकेत एवं अन्य 15 श्रमिक शामिल थे, ने न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया था कि अनावेदक राम ललन तिवारी ने निर्माण कार्य में श्रमिकों की सेवाएं ली थीं, लेकिन कार्य पूर्ण होने के बाद भी 3 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क एवं साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों की गहन समीक्षा करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आवेदकगण मजदूरी के दावे को प्रमाणित करने में असफल रहे।
माननीय न्यायालय ने कहा कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज एवं गवाहियों में मजदूरी का बकाया साबित नहीं हो सका, जिसके आधार पर श्रम न्यायालय ने इंद्रजीत साकेत एवं अन्य के दावे को अस्वीकृत कर दिया।
इस मामले में अनावेदक राम ललन तिवारी की ओर से जाने-माने अधिवक्ता कुलदीप सिंह सोमवंशी ने प्रभावी पैरवी की*, जिसके चलते अनावेदक पक्ष को न्यायालय से राहत मिली।
इस निर्णय के बाद श्रमिक वर्ग में निराशा देखी गई, जबकि अनावेदक राम ललन तिवारी ने न्यायालय के निर्णय को अपने पक्ष में न्याय की जीत बताया। मामले के परिणामस्वरूप भविष्य में निर्माण कार्यों में श्रमिकों के अधिकारों और भुगतान संबंधी विवादों को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

