न्यायलय ने संजय सिंह बघेल को दोषमुक्त घोषित किया
रीवा। बारहवें अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती कंचन गुप्ता की अदालत ने आज दिनांक 24 जनवरी 2025 को दांडिक अपील क्रमांक 120/2024 संजय सिंह बघेल बनाम कृष्णेंद्र शर्मा में महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए अपीलार्थी/आरोपी संजय सिंह बघेल को सभी आरोपों से दोषमुक्त घोषित कर दिया है। इस फैसले से आरोपी को बड़ी राहत मिली है।
परिवादी कृष्णेंद्र शर्मा ने वर्ष 2016 में अधीनस्थ न्यायालय, न्यायिक दंडाधिकारी श्री अक्षत तायल के समक्ष परिवाद पत्र क्रमांक एससीएनआईई 533/2016 प्रस्तुत किया था। परिवादी ने शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी संजय सिंह बघेल ने उनसे 5 लाख रुपए उधार लिए थे, जिसकी अदायगी के लिए उन्होंने अपने बैंक खाते का एक चेक दिया था। जब परिवादी ने उक्त चेक बैंक में प्रस्तुत किया, तो वह अपर्याप्त राशि के कारण बाउंस हो गया।
परिवादी द्वारा आरोपी से बार-बार राशि की मांग करने के बावजूद भुगतान न होने पर, उन्होंने विधिक कार्रवाई करते हुए न्यायालय में परिवाद दायर किया। लंबी सुनवाई के बाद, 12 सितंबर 2024 को अधीनस्थ न्यायालय ने आरोपी को धारा 138, परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881 के तहत दोषी मानते हुए 1 वर्ष के कारावास एवं 9 लाख 65 हजार रुपए प्रतिकर अदा करने का दंड सुनाया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि आरोपी द्वारा प्रतिकर राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उसे 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अपील और न्यायालय का निर्णय:
इस फैसले के विरुद्ध अपीलार्थी/आरोपी संजय सिंह बघेल ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में अपील दायर की। मामले में सुनवाई के दौरान अपीलार्थी के अधिवक्ता कुलदीप सिंह सोमवंशी ने तर्क प्रस्तुत करते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं थे तथा अदायगी से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए थे।
दोनों पक्षों के गहन तर्क-वितर्क एवं साक्ष्यों की समीक्षा के पश्चात, माननीय न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा दिए गए कारावास एवं प्रतिकर के आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य अपीलार्थी को दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए उन्हें दोषमुक्त घोषित किया जाता है।
आरोपी को मिली राहत:
इस निर्णय के साथ ही अपीलार्थी संजय सिंह बघेल, पिता केके सिंह, उम्र 40 वर्ष, निवासी गांधी स्टेडियम के पास, थाना कोतवाली, जिला शहडोल, मध्य प्रदेश, को राहत मिली है। न्यायालय के आदेश के बाद, उन्होंने अपने अधिवक्ता एवं परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मामले में पैरवी: इस प्रकरण में अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता कुलदीप सिंह सोमवंशी ने प्रभावी पैरवी करते हुए तथ्यों और कानून के आधार पर उनकी बेगुनाही को साबित किया।
माननीय सत्र न्यायालय द्वारा पारित इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक प्रक्रिया में उचित साक्ष्यों और तथ्यों का विशेष महत्व है। अपीलार्थी को न्याय मिलना उनके लिए बड़ी राहत की बात है।

