नेशनल हाईवे 30 पर भीषण सड़क दुर्घटना: दो दर्जन घायल, सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
रीवा: राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर रीवा से चाकघाट के बीच स्थित कलवारी थाना क्षेत्र में एक भीषण सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें लगभग दो दर्जन लोग घायल हो गए। यह हादसा 31 जनवरी 2025 की रात करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच हुआ, जब mp17mb 6143 नंबर का ट्रैक्टर प्रयागराज से गंगा स्नान कर लौट रहा था। घायलों को तत्काल गढ़ थाना पुलिस द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव पहुंचाया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों को संजय गांधी अस्पताल, रीवा रेफर किया गया।
घायलों की सूची
इस दुर्घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से –
शोभा द्विवेदी शकुंतला द्विवेदी, मोनू द्विवेदी, पिंकी शर्मा ,कीर्ति द्विवेदी ,रामजी शर्मा, विमलेंद्र द्विवेदी, हिमांशु पाठक, प्रमोद मिश्रा, आदि शामिल हैं।सभी घायल रीवा जिले के ग्राम विरहा थाना चोरहटा जिला रीवा मध्यप्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं, जो अपने परिवार व संपर्कों के साथ गंगा स्नान के लिए प्रयागराज गए थे और लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गए।
कैसे हुई दुर्घटना? प्रमुख कारण:
1. रात्रि में सड़क पर प्रकाश की समस्या – सड़क किनारे लगे डिवाइडर पर झाड़ियां न होने के कारण वाहनों की रोशनी आपस में टकरा रही थी, जिससे दृश्यता प्रभावित हुई।
2. ड्राइवर को झपकी आने की संभावना – प्राथमिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि वाहन चालक को नींद आ गई होगी, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी क्योंकि अभी तक चालक से पूछताछ नहीं हो पाई है।
3. सड़क की खस्ताहाल स्थिति – 80 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन हाइवे पर कई स्थानों पर अवैध कटिंग की गई है, जिससे वाहनों की तेज रफ्तार में दुर्घटनाएं होने की संभावना बढ़ जाती है।
सड़क की स्थिति पर सवालिया निशान
यह राष्ट्रीय राजमार्ग मध्य प्रदेश के रीवा जिले से होकर गुजरता है और वर्ष 2000 में इसका निर्माण हुआ था। बावजूद इसके, सड़क की स्थिति बेहद खराब है।डिवाइडर पर झाड़ियां नहीं लगाई गईं, जिससे रात में रोशनी की परावर्तन समस्या बनी रहती है।लगभग 150 से 200 स्थानों पर डिवाइडर को अवैध रूप से काटा गया है, जिससे वाहन आपस में टकराने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
ओवरब्रिज के नीचे बाईपास रोड का निर्माण नहीं हुआ है, जिससे सड़क पर अत्यधिक दबाव बना रहता है और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।टोल प्लाजा पर शुल्क वसूली तो हो रही है, लेकिन सड़क का रखरखाव सही से नहीं किया जा रहा है।कौन है जिम्मेदार? प्रशासन और सड़क निर्माण कंपनी पर उठे सवालइस हाईवे का निर्माण एक निजी रोड निर्माण कंपनी के अधीन है, जिसे 30 वर्षों तक रोड के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी सड़क पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है।प्रशासन की ओर से किसी भी सड़क सुधार अभियान की शुरुआत नहीं की गई, जिससे यह फोरलेन अब 'दुर्घटनाओं की सड़क' बन चुका है।
समाधान और आवश्यक कदम
डिवाइडर पर झाड़ियां और सोलर लाइट लगाई जाएं, ताकि रात में दृश्यता बनी रहे।अवैध कटिंग को तुरंत रोका जाए और उचित सुरक्षा बैरियर लगाए जाएं।सड़क निर्माण कंपनी से जवाबदेही तय कर जुर्माना लगाया जाए और उनकी लापरवाही की जांच की जाए।दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बड़े चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा गाइडलाइन लगाए जाएं।बीमा कंपनियों को भी संज्ञान लेना चाहिए, ताकि घायलों को शीघ्र मुआवजा मिल सके।सुरक्षा उपायों को दुरुस्त करने के लिए उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक बुलाई जाए।
क्या बोले स्थानीय लोग?
घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि इस हाईवे पर हर महीने कई दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता।एक स्थानीय नागरिक रामनारायण तिवारी का कहना है –हमने कई बार प्रशासन को शिकायत दी कि इस सड़क पर सुधार किया जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यह सड़क मौत का जाल बन चुकी है। प्रशासन कब जागेगा?"
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस प्रशासन ने इस मामले की पुष्टि करते हुए कहा है कि दुर्घटना की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।रीवा से चाकघाट तक का यह फोरलेन अब मौत का हाईवे बनता जा रहा है। यदि प्रशासन ने जल्द से जल्द उचित कदम नहीं उठाए, तो ऐसी दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रहेगा। सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन को कठोर कदम उठाने होंगे, ताकि निर्दोष यात्रियों की जान न जाए और यह हाईवे सुरक्षित बन सके।





