चार साल से न्याय की तलाश में भटक रहा भाई, राजस्व और पुलिस विभाग की उदासीनता से परेशान
ग्राम पंचायत मदारी, तहसील सिरमौर, जिला रीवा (मध्य प्रदेश)
ग्राम पंचायत मदारी में पारिवारिक संपत्ति विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। अजय कुमार गर्ग अपने हिस्से की जमीन को लेकर पिछले चार वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता और पुलिस विभाग की लापरवाही ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
पिता की मृत्यु के बाद शुरू हुआ विवाद
अजय कुमार गर्ग और उनके भाई अवधेश गर्ग के बीच 8 एकड़ 9 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद जारी है। यह जमीन बटवा बस मोड़ रोड से सटी हुई है, जिसकी कीमत और महत्व दोनों ही काफी अधिक हैं। पिता की मृत्यु के बाद दोनों भाइयों के बीच संपत्ति का बंटवारा नहीं हो सका, जिससे यह विवाद और गहराता गया।
फर्जी दस्तावेजों से कब्जा, प्रशासन मूकदर्शक
अजय कुमार का आरोप है कि उनके भाई अवधेश गर्ग ने कूट रचित दस्तावेज तैयार कर पूरी जमीन अपने नाम करा ली। कोरोना काल के दौरान जब अजय कुमार को इस धोखाधड़ी का पता चला तो उन्होंने खसरा सुधार के लिए आवेदन किया। तहसीलदार और एसडीओ के आदेश पर दिनांक 1 जनवरी 2023 को खसरा रिकॉर्ड में सुधार किया गया, जिसमें दोनों भाइयों और दो बहनों के नाम दर्ज किए गए।
हालांकि, अपर कलेक्टर ने इस आदेश को बरकरार रखा, लेकिन अवधेश गर्ग का जमीन पर कब्जा बना रहा। अजय कुमार ने आरोप लगाया कि अवधेश गर्ग को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से उन्हें उनके हिस्से की जमीन से वंचित किया जा रहा है।
भाई की धमकियों से डरकर घर छोड़ने को मजबूर
अजय कुमार ने बताया कि जब भी वह गांव आते हैं, उनके भाई अवधेश गर्ग उन्हें धमकाते हैं और कई बार मारपीट की घटनाएं भी हो चुकी हैं। सुरक्षा के अभाव में अजय कुमार अपने परिवार के साथ गांव छोड़कर बाहर रह रहे हैं। उनका पैतृक मकान भी जर्जर हो चुका है, लेकिन वह मरम्मत कराने में असमर्थ हैं।
अदालत की प्रक्रिया में देरी से निराशा
हाल ही में अनुभाग सिरमौर द्वारा अजय कुमार को आदेश क्रमांक 425/रीडर/पब्लिक/2025 जारी किया गया है, जिसमें उन्हें जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया है। हालांकि, अजय कुमार का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है, जिससे उनका मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है।
प्रशासन और पुलिस से न्याय की गुहार
अजय कुमार ने प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग की है कि जब तक इस संपत्ति का कानूनी समाधान नहीं निकलता, तब तक विवादित जमीन को सरकारी संरक्षण या किसी तटस्थ व्यक्ति की देखरेख में रखा जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि राजस्व विभाग और पुलिस मिलकर इस विवाद का शीघ्र समाधान करें।
अजय कुमार की प्रमुख मांगें:
1. निष्पक्ष बंटवारा: चारों हिस्सेदारों के बीच जमीन का न्यायसंगत बंटवारा किया जाए।
2. सरकारी संरक्षण: विवादित जमीन को सरकारी देखरेख में लिया जाए ताकि कोई पक्षकार इसका दुरुपयोग न कर सके।
3. सुरक्षा व्यवस्था: अजय कुमार को गांव में सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वह बिना डर के रह सकें।
4. शीघ्र न्याय: राजस्व और पुलिस विभाग मिलकर समयसीमा में इस विवाद का समाधान करें।
स्थानीय प्रशासन पर सवाल
गांव में हाल ही में एक पारिवारिक विवाद के चलते एक व्यक्ति की मृत्यु भी हो चुकी है, जिससे गांव का माहौल तनावपूर्ण है। ऐसी स्थिति में प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि समय रहते इस विवाद का निपटारा नहीं हुआ, तो यह विवाद और गंभीर रूप ले सकता है।
अजय कुमार गर्ग ने प्रशासन से अपील की है कि उन्हें जल्द से जल्द न्याय दिया जाए ताकि वे और उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है और अजय कुमार को कब तक न्याय मिलता है।

