गदही गो अभ्यारण्य में गोवंशों की मौत का सिलसिला जारी
क्षमता से अधिक गोवंश रखने के कारण भूख-प्यास से हो रही मौतें, दलालों का बढ़ता दखल
रीवा, 29 जनवरी 2025 – रीवा जिले के गंगेव जनपद में स्थित गदही गो अभ्यारण्य में गायों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस अभ्यारण्य की आधारशिला रखी थी और इसे एशिया का सबसे बड़ा गो-अभ्यारण्य बताया गया था। लेकिन अभी तक यहां अव्यवस्था और कुप्रबंधन के चलते गायों की दुर्दशा हो रही है।
गोवंशों के लिए न भूसा, न पानी, न शेड
गदही गो अभ्यारण्य में हजारों की संख्या में गोवंशों को लाकर ठूंस दिया गया है, जबकि यहां इतनी बड़ी संख्या में जानवरों की देखरेख की समुचित व्यवस्था नहीं है। नतीजतन, सैकड़ों गायें भूख, प्यास और ठंड से दम तोड़ रही हैं। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में 25 से 30 गायों की मौत हो चुकी है। मृत पशुओं को उठाने के लिए जिम्मेदार कर्मचारी झल्लू साकेत ने साफ कह दिया कि उसे बकाया भुगतान नहीं मिला है, इसलिए अब वह मरी गायों को नहीं उठाएगा।
दलालों की मिलीभगत से हो रही लापरवाही
जानकारी के अनुसार, पहले यह गोशाला पंचायत द्वारा संचालित थी, लेकिन जब राजेश पांडेय (जो उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के करीबी बताए जाते हैं) ने इसका प्रबंधन संभाला, तब से इसमें धांधली और दलाली बढ़ गई। गांव वालों का कहना है कि गोशाला के फंड का उपयोग पशुओं की देखभाल में कम और निजी हितों में ज्यादा किया जा रहा है। हालत यह है कि 200 गायों की क्षमता वाले शेड में 600 से अधिक गोवंश रखे गए हैं, जिससे अव्यवस्था और बदइंतजामी और बढ़ गई है।
विकास तिवारी के वैकल्पिक पशु शेड में भी हालात खराब
गंगेव जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी, जो पहले कांग्रेस में थे और अब भाजपा में शामिल हैं, उन्होंने भी गदही अभ्यारण्य के समीप बिना किसी उचित व्यवस्था के एक अस्थायी गोशाला बनवाई है। लेकिन वहां भी हालात बदतर हैं। पशुओं को चारा और पानी तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे वे भूख और ठंड से मर रहे हैं।
मृत गायों के चमड़े और हड्डियों पर गिद्ध दृष्टि
अब सवाल यह उठता है कि जब गोशाला में मरने वाले जानवरों को उठाने वाला भी नहीं बचा, तो इन मृत गायों का क्या होगा? स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कुछ कथित गो-सेवक अब इन मृत पशुओं की खाल और हड्डियों का व्यापार करने की फिराक में हैं।
प्रशासन मौन, जिम्मेदार कौन?
गदही गो अभ्यारण्य की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। प्रशासन की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते बेबस गोवंश तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर हैं।



