"मुख्यमंत्री जन कल्याण शिविर बना प्रशासनिक उदासीनता का शिकार, अधिकारी नदारद – जनता को फिर मिली निराशा"
ग्राम पंचायत मुंडिला जनपद नईगढ़ी जिला (मऊगंज), 22 जनवरी 2025:
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आम जनता को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने के उद्देश्य से "मुख्यमंत्री जन कल्याण शिविर" का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में आज ग्राम पंचायत मुंडिला जनपद पंचायत नईगढ़ी, जिला मऊगंज में एक शिविर आयोजित किया गया, जो सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलना था। लेकिन इस शिविर में प्रशासनिक लापरवाही साफ नजर आई। मौके पर अधिकारियों की अनुपस्थिति और उचित प्रबंधन के अभाव के कारण यह शिविर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया।
शिविर में व्यवस्थाएं पूरी, मगर अधिकारी गायब
शिविर स्थल पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुंडिला में आवश्यक व्यवस्थाएं जैसे टेंट, कुर्सियां और मंच की व्यवस्था की गई थी। लेकिन सुबह 10:30 बजे से ही बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीण हितग्राही अधिकारियों का इंतजार करते रहे। दोपहर 12:00 बजे तक कोई भी संबंधित अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे निराश होकर ग्रामीण वापस लौटने लगे। मौके पर आए लोगों का कहना था कि उन्हें योजनाओं की जानकारी और लाभ लेने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें सिर्फ खाली कुर्सियां और सजीव प्रशासनिक उपेक्षा ही देखने को मिली।
शिविर में शामिल होने थे ये विभाग
इस शिविर में महिला एवं बाल विकास, कृषि विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को उपस्थित रहकर जनसमस्याओं का समाधान करना था। सरकार द्वारा इन विभागों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं को लागू करने का दावा किया जाता है, लेकिन मौके पर अधिकारियों की गैरमौजूदगी ने सरकार के इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों की शिकायत - योजनाएं कागजों तक सीमित
मुदिला गांव के ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीणों का कहना था कि वे शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, पेंशन योजनाएं और अन्य सरकारी लाभों की जानकारी लेने और आवेदन की स्थिति जानने के लिए आए थे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल शहरी और कस्बाई इलाकों तक सीमित रहते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है।
प्रशासन की मनमानी से जनता नाराज
ग्रामीणों ने बताया कि सरकार की ओर से योजनाओं का लाभ देने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जब भी शिविरों का आयोजन होता है, तब अधिकारियों की उदासीनता सामने आती है। उनका कहना था कि यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की लापरवाही हुई है, इससे पहले भी आयोजित शिविरों में अधिकारी नाममात्र की उपस्थिति दर्ज कराकर चले जाते हैं।
लाखों का खर्च, फिर भी जनता को कुछ नहीं मिला
शिविर के आयोजन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते, तो जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाता। टेंट, कुर्सियों और अन्य व्यवस्थाओं पर सरकारी धन खर्च किया जाता है, लेकिन जनता को केवल दिखावे और कागजी कार्यवाही से संतुष्ट किया जा रहा है।
जनता की मांग – हो उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अपील की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ग्रामीणों के साथ ऐसी धोखाधड़ी न हो। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो जनता का सरकार पर से विश्वास उठ जाएगा।
क्या कहता है प्रशासन?
इस पूरे मामले में जब प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि किसी कारणवश देरी हुई होगी और जल्द ही अधिकारियों को भेजा जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यह हमेशा की तरह सिर्फ आश्वासन ही साबित होगा।
शिकायतें दर्ज, जल्द होगी कार्रवाई
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 और जिला कलेक्टर कार्यालय में इस शिविर की अव्यवस्थाओं और अधिकारियों की गैरहाजिरी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।


