खाद्य विभाग की लापरवाही से उपभोक्ताओं की सेहत पर संकट: नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार
विंध्य वसुंधरा समाचार, रीवा/मऊगंज
रीवा और मऊगंज जिलों में मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों की बाढ़ आ गई है, जिससे आम जनता की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। खाद्य विभाग और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते बाजार में खुलेआम घटिया और हानिकारक खाद्य सामग्री बेची जा रही है। आवश्यक वस्तुएं जैसे मसाले, आटा, बेसन, दाल, नमकीन, शक्कर और साबूदाना में बड़े पैमाने पर मिलावट की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन इन पर अंकुश लगाने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
बढ़ती मिलावट: स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानों और थोक बाजारों में मिलावटी एवं नकली उत्पादों की बेतहाशा बिक्री हो रही है। मिलावटी खाद्य पदार्थों में ऐसे हानिकारक रसायन मिलाए जा रहे हैं जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं। चिकित्सकों के अनुसार, इन घटिया खाद्य पदार्थों का सेवन करने से फूड पॉयजनिंग, लीवर खराबी, किडनी फेलियर और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों की राय:
डॉक्टरों का कहना है कि मिलावटी और केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों के कारण लोग गैस्ट्रिक, त्वचा रोग, हृदय रोग और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में इनका दुष्प्रभाव अधिक देखा जा रहा है।
होटलों और मिठाई दुकानों में गंदगी और मिलावट
रीवा और मऊगंज के विभिन्न इलाकों में स्थित होटल और मिठाई की दुकानों में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। बासी और मिलावटी तेल का इस्तेमाल कर मिठाइयां बनाई जा रही हैं। कई जगहों पर मिठाइयों में मिलावटी खोया और सिंथेटिक रंगों का उपयोग हो रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। स्थानीय प्रशासन इस ओर आंख मूंदे बैठा है, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
बाजारों में नकली उत्पादों की धड़ल्ले से बिक्री
थोक बाजारों और किराना दुकानों में लोकप्रिय ब्रांड्स के नाम पर नकली उत्पादों की बिक्री बढ़ती जा रही है। व्यापारियों द्वारा मिलावटी और नकली उत्पादों को अधिक लाभ कमाने के लिए ग्राहकों को बेचा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई उत्पादों पर गलत लेबलिंग, एक्सपायरी तिथि में हेरफेर और मिलावटी पदार्थों का खुलकर उपयोग किया जा रहा है।
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है:
"हम मजबूरी में बाजार से सामान खरीद रहे हैं, लेकिन नकली और मिलावटी सामान की पहचान करना मुश्किल हो गया है। खाद्य विभाग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।"
जीएसटी की आड़ में टैक्स चोरी और भ्रष्टाचार
खाद्य व्यापार से जुड़े व्यापारी जीएसटी की आड़ में उपभोक्ताओं से अवैध वसूली कर रहे हैं। ग्राहकों को सादे कागजों पर रसीदें दी जा रही हैं और सरकारी करों की खुलकर चोरी हो रही है। जानकारी के अनुसार, रीवा और मऊगंज जिलों में हर महीने करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी हो रही है।
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि रीवा से बिना बिल के सामान लाया जाता है और अधिकारियों को मासिक रिश्वत देकर इस धंधे को सुचारू रूप से चलाया जाता है।
नापतोल विभाग की निष्क्रियता भी उजागर
नापतोल विभाग भी इस अवैध कारोबार में मूकदर्शक बना हुआ है। दुकानदार बिना रेट लिस्ट के ही सामान बेच रहे हैं और मनमाने दाम वसूल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में साबूदाना और शक्कर में सल्फर और अन्य हानिकारक रसायनों की मिलावट की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सैंपलिंग और रिकॉर्ड जांच से हो सकता है बड़ा खुलासा
अगर खाद्य विभाग द्वारा दुकानदारों के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री और खरीद रजिस्टर की जांच की जाए, तो बड़े स्तर पर हो रहे घोटालों का पर्दाफाश हो सकता है। लेकिन मिलीभगत और भ्रष्टाचार के चलते जांच प्रक्रिया को अधर में लटकाया जा रहा है।
जनता और सामाजिक संगठनों की मांग: हो सख्त कार्रवाई
रीवा और मऊगंज क्षेत्र की जनता और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि –
1. खाद्य सुरक्षा और नापतोल विभाग की निष्क्रियता की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
2. दुकानों और होटलों में नियमित निरीक्षण कर सैंपलिंग की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
3. बिना बिल और नकली खाद्य पदार्थों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जाए।
4. भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
5. खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं।
उपभोक्ताओं की जागरूकता जरूरी
उपभोक्ताओं को मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों से बचने के लिए सतर्क रहना होगा। सरकार और खाद्य विभाग पर निर्भर रहने के बजाय खरीदारी के समय कैश मेमो और जीएसटी बिल लेना सुनिश्चित करें।
यदि किसी को मिलावट या नकली सामान की शिकायत हो, तो तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग में इसकी सूचना दें।
खाद्य विभाग की उदासीनता और व्यापारियों की मनमानी के कारण उपभोक्ताओं की सेहत खतरे में पड़ रही है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।


