🔴 उपभोक्ताओं की सेहत पर संकट: खाद्य विभाग की लापरवाही से बाजार में ज़हरीले और नकली खाद्य पदार्थों की भरमार 🔴
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा/मऊगंज:
खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए स्थापित विभागों की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण आम जनता की सेहत खतरे में पड़ गई है। रीवा और मऊगंज क्षेत्रों में खुलेआम घटिया, मिलावटी और नकली खाद्य सामग्री बेची जा रही है। मसाले, साबूदाना, शक्कर, नमकीन, आटा, बेसन, दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं में न केवल गुणवत्ता की कमी है, बल्कि इनमें हानिकारक रसायनों की मिलावट भी की जा रही है।
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| काल्पनिक तस्वीर |
मिलावट और नकली उत्पादों का गोरखधंधा
किराना दुकानों और थोक बाजारों में एक्सपायरी डेट वाले सामान और ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली कंपनियों के उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे हैं। यह स्थिति खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में धड़ल्ले से घटिया माल बेचा जा रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
होटलों और मिठाई की दुकानों में गंदगी और मिलावट
होटल और मिठाई की दुकानों में साफ-सफाई के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मिलावटी मिठाइयों और खाने-पीने की चीज़ों की बिक्री लगातार जारी है, जिससे उपभोक्ताओं को फूड पॉयजनिंग, लीवर, किडनी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। खाद्य विभाग के अधिकारी इन समस्याओं पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
जीएसटी की आड़ में टैक्स चोरी और काला कारोबार
व्यापारी जीएसटी के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सादे कागज पर रसीदें दी जा रही हैं। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के टैक्स का नुकसान हो रहा है। कई दुकानदारों ने स्वीकार किया है कि रीवा से सामान लोड करते समय बिना बिल के माल मंगाया जाता है और हर महीने अधिकारियों को सेवा शुल्क के नाम पर रिश्वत दी जाती है।
रीवा और मऊगंज जिले में करोड़ नहीं अरबो रुपए की प्रति महीने टैक्स की चोरी हो रही है जिससे काली कमाई करोड़ों करोड़ों रुपए होती है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपनी निजी तिजोरियों को भर रहे है।
नापतोल विभाग और खाद्य विभाग की निष्क्रियता
नापतोल विभाग भी पूरी तरह से मूकदर्शक बना हुआ है। दुकानदार बिना रेट लिस्ट के मनमाने दामों पर सामान बेच रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में साबूदाना और शक्कर जैसी सामग्री में सल्फर और हानिकारक रसायनों की मिलावट पाई गई है। इन उत्पादों की सैंपलिंग और जांच नहीं की जा रही है।
सैंपलिंग और रजिस्टर मिलान से खुलेंगे घोटाले
यदि दुकानदारों और थोक व्यापारियों के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और खरीद रजिस्टर का मिलान किया जाए तो कई बड़े घोटाले उजागर हो सकते हैं। खाद्य विभाग और नापतोल विभाग के कर्मचारी और अधिकारी इन अनियमितताओं पर आंख मूंदे बैठे हैं।
सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग
मध्य प्रदेश सरकार से यह मांग की जा रही है कि:
1. खाद्य विभाग और नापतोल विभाग की कार्यप्रणाली की गहन जांच कराई जाए।
2. दुकानों और होटलों में बिकने वाली खाद्य सामग्रियों के सैंपल लेकर जांच कराई जाए।
3. बिना रसीद और बिना बिल के सामान की बिक्री पर सख्त कार्रवाई हो।
4. भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी सजा दी जाए।
उपभोक्ताओं की जागरूकता जरूरी
उपभोक्ताओं से अपील है कि वह सामान खरीदते समय कैश मेमो और जीएसटी बिल अवश्य लें। मिलावटी और घटिया खाद्य पदार्थ की शिकायत तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग में दर्ज कराएं।


