सोहागी धान खरीदी घोटाला: प्रभारी सहित दो पर एफआईआर दर्ज, जांच जारी
रीवा। सोहागी धान खरीदी केंद्र में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्र प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई नायब तहसीलदार और जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें 5146.60 क्विंटल धान की गड़बड़ी उजागर हुई थी।
धान खरीदी में फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर नायब तहसीलदार वीरेंद्र द्विवेदी और जिला प्रबंधक सहकारी बैंक ज्ञानेंद्र पाण्डेय ने केंद्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान यह पाया गया कि पोर्टल पर दर्ज धान की मात्रा और मौके पर उपलब्ध धान में भारी अंतर था। इस गड़बड़ी की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपे जाने के बाद एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
नामजद आरोपी और आरोपों की गंभीरता
पुलिस ने खरीदी केंद्र प्रभारी राजाबाबू यादव और कंप्यूटर ऑपरेटर श्रीकांत मिश्रा को आरोपी बनाया है। आरोप है कि दोनों ने मिलकर पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज कर किसानों के फर्जी नामों का इस्तेमाल किया। जांच में यह भी सामने आया कि जिन किसानों के नाम पर धान खरीदी दिखाई गई थी, वे वास्तव में मौजूद ही नहीं थे, और न ही उनके द्वारा धान बेची गई थी।
आशंका जताई जा रही है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए उत्तर प्रदेश से लाई गई धान को खपाने की साजिश रची गई थी, जिसके लिए गलत डेटा पोर्टल पर अपलोड किया गया।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
1. फर्जी किसानों के नाम से धान खरीदी दर्ज: पोर्टल पर ऐसे किसानों के नाम जोड़े गए जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है।
2. मौके पर धान का अभाव: पोर्टल में दर्ज कुल मात्रा में से 5146.60 क्विंटल धान मौके से नदारद पाई गई।
3. यूपी से लाई गई धान को खपाने की योजना: बाहरी राज्य से धान लाकर इसे स्थानीय खरीदी दिखाकर सरकारी लाभ उठाने की कोशिश की गई।
प्रशासन की सख्ती और आगामी कार्रवाई
सोहागी थाना पुलिस ने इस मामले में शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। एसडीओपी त्योंथर उदित मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है। अन्य संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। – उदित मिश्रा, एसडीओपी त्योंथर
धान खरीदी घोटाले की गंभीरता
सोहागी धान खरीदी केंद्र में हुआ यह घोटाला कोई अकेला मामला नहीं है। प्रदेश भर में कई खरीदी केंद्रों में इस तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें आती रही हैं, जहां किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर बाहरी राज्यों की धान खपाने की साजिशें सामने आती हैं।
स्थानीय प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि यदि उन्हें खरीदी केंद्रों में किसी भी प्रकार की अनियमितता नजर आती है, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें ताकि सख्त कदम उठाए जा सकें।
सोहागी धान खरीदी केंद्र का यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है कि कैसे सरकारी योजनाओं में धांधली कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और प्रशासन इस घोटाले पर क्या ठोस कदम उठाता है।

