महाकुंभ 2025: मोनी अमावस्या पर शाही स्नान को जा रहे श्रद्धालुओं को रीवा जिले की अव्यवस्थाओं ने किया परेशान
रीवा, 28 जनवरी 2025: मोनी अमावस्या पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है, और इस दिन लाखों श्रद्धालु प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान के लिए उमड़ते हैं। महाकुंभ 2025 के इस महत्वपूर्ण आयोजन में जहां श्रद्धालुओं को आस्था की डुबकी लगाने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के रीवा जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 30 की अव्यवस्था और लापरवाही ने इस यात्रा को कष्टदायक बना दिया है।
रीवा जिले की बदहाल व्यवस्थाएं न केवल प्रशासन की विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर उनकी गंभीरता पर भी सवाल खड़े करती हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 की बदहाल स्थिति
आज शाम 7 से 8 बजे के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 30 की व्यवस्था देखी गई। , जो रीवा जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि यह मार्ग श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों के लिए असुविधा का मुख्य कारण बन चुका है।
क्षतिग्रस्त सड़कें: मार्ग पर हर जगह सड़कें गड्ढों में बदल चुकी हैं। बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहनों को निकलने में भारी दिक्कतें हो रही हैं।
ट्रैफिक बाधित: सड़क किनारे लोग अपने वाहन खड़े कर चाय-नाश्ता करते नजर आए, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था।
सुरक्षा का अभाव: लोग सड़कों के बीच से पैदल गुजर रहे थे, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की न्यूनतम गति 80 किमी/घंटा होती है। ऐसे में दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
महिलाओं को हो रही खास दिक्कतें
महिलाओं के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है। हजारों महिला श्रद्धालु खुले में शौच करने को मजबूर हैं। यह न केवल असुविधाजनक है, बल्कि उनकी गरिमा और सुरक्षा के लिए भी खतरा है। इस प्रकार की लापरवाही ने महिलाओं की यात्रा को बेहद कठिन बना दिया है।
होटलों में मनमानी और खाद्य विभाग की निष्क्रियता
मार्ग पर स्थित होटलों और ढाबों में भोजन व चाय-नाश्ते के मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
रेट सूची का अभाव: किसी भी होटल पर रेट सूची चस्पा नहीं की गई है।
गुणवत्ता पर सवाल: खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर कोई जांच या निगरानी नहीं हो रही है।
यात्रियों में आक्रोश: यात्रियों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता ने होटल संचालकों को लूट की छूट दे दी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 रीवा से लेकर चाकघाट के बीच में कई जगह होटल संचालकों अपने सुविधा अनुसार डिवाइडर काट दिए हैं जो वीडियो में दिख रहा है। जो दुर्घटना का मुख्य कारण सड़कों के बीच कटे डिवाइडर है। इन होटल संचालकों को किसका संरक्षण प्राप्त है जो लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है। पैसे कमाने के चक्कर में।
अधूरी परियोजनाएं और निर्माण कंपनी की लापरवाही
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर कई स्थानों पर अधूरे ओवरब्रिज और टूटी सड़कों ने यातायात को बाधित कर दिया है।
अनुबंध पर सवाल: यह सड़क 30 साल के अनुबंध पर निर्माण कंपनी के अधीन है। लेकिन कंपनी द्वारा समय पर कार्य पूरा न करना और प्रशासन की अनदेखी दुर्घटनाओं और यातायात अव्यवस्था का मुख्य कारण बन रही है।
कार्रवाई का अभाव: अभी तक निर्माण कंपनी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा के अभाव के कारण प्रतिदिन दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। श्रद्धालु और स्थानीय लोग, जिन्हें सड़क की क्षतिग्रस्त स्थिति और अधूरी परियोजनाओं की जानकारी नहीं है, अचानक सड़क पार करते हैं, जिससे हादसे हो रहे हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता
रीवा जिले के जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि, जिनमें रीवा विधायक, गुड़ विधायक, मऊगंज विधायक, देवतालाब विधायक, मनगवा विधायक और त्यौंथर विधायक शामिल हैं, इस गंभीर समस्या पर मूकदर्शक बने हुए हैं।
रीवा जिले की यह दुर्दशा तब और चिंताजनक हो जाती है जब यह राज्य के उपमुख्यमंत्री का गृह जिला और विधानसभा क्षेत्र है। जनता में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी श्रद्धालुओं की समस्याओं के प्रति उदासीन क्यों हैं।
मुख्य सवाल जो उठ रहे हैं
1. सड़क निर्माण कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
2. क्षतिग्रस्त सड़कों और अधूरी परियोजनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है?
3. महिलाओं के लिए शौचालय और यात्रियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
4. होटलों में मनमानी रोकने के लिए खाद्य विभाग सक्रिय क्यों नहीं है?
5. राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा संकेतक और जागरूकता बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए?
श्रद्धालुओं की मांग
श्रद्धालुओं ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से इन समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।
सड़क की मरम्मत और अधूरी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए।
महिलाओं के लिए शौचालय और स्वच्छता की व्यवस्था हो।
होटलों में रेट सूची अनिवार्य रूप से चस्पा की जाए और खाद्य विभाग नियमित जांच करे।
सड़क पर सुरक्षा संकेतक और जागरूकता बोर्ड लगाए जाएं।
मोनी अमावस्या जैसे पवित्र पर्व पर श्रद्धालुओं को इस प्रकार की अव्यवस्थाओं का सामना करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता ने न केवल सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था को ठेस पहुंचाई है, बल्कि उनकी सुरक्षा और सुविधा पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया है।

