रीवा-चाकघाट मार्ग पर निजी बसों की मनमानी: प्रशासनिक लापरवाही या राजनीतिक संरक्षण?
रीवा। रीवा से चाकघाट मार्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों निजी बसों का संचालन होता है, लेकिन यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। निजी बस संचालक नियमों की अनदेखी कर मनमाना किराया वसूल रहे हैं और यात्रियों को उचित टिकट तक नहीं दिया जा रहा। प्रशासनिक लापरवाही और संभावित राजनीतिक संरक्षण के चलते बस संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
यात्रियों की शिकायतें और अव्यवस्थाएं
यात्रियों का कहना है कि बसों में सफर करने पर उन्हें स्पष्ट जानकारी युक्त टिकट नहीं दिए जाते। अधिकतर कंडक्टर यात्रा का प्रारंभिक और अंतिम बिंदु, किराया, व तिथि दर्ज किए बिना ही सिर्फ मुहर लगी पर्चियां थमा देते हैं, जिससे विवाद की स्थिति में यात्रियों के पास कोई प्रमाण नहीं होता।
मनमानी किराया वसूली और सूची का अभाव
बसों में किराया सूची का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन नहीं किया गया है, जिससे कंडक्टर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं। खासतौर पर छात्र, मजदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। चालक और परिचालक सिविल ड्रेस में रहते है। जबकि इन्हें बर्दी के साथ साथ बेंच अनिवार्य है। जिसमें साफ साफ नाम लिखा रहना चाहिए किंतु ऐसा नहीं होता है।
ओवरलोडिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी
रीवा-चाकघाट मार्ग पर चलने वाली बसों में ओवरलोडिंग आम बात हो गई है। 40 सीटों वाली बस में 80, 60 सीटर बसों में 100 से अधिक, और दो तले वाली बसों में 150 से 200 यात्री ठूंस-ठूंसकर भरे जाते हैं। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
प्रशासन की चुप्पी: लापरवाही या दबाव?
यात्रियों की लगातार शिकायतों के बावजूद परिवहन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राजनीतिक दबाव के कारण प्रशासन इस समस्या से आँख मूंदे बैठा है। सवाल यह उठता है कि जब सभी अनियमितताएं स्पष्ट हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
यात्रियों की मांगें
रीवा-चाकघाट मार्ग के यात्रियों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
1. किराया सूची का सार्वजनिक प्रदर्शन: सभी बसों में किराया सूची चस्पा की जाए।
2. स्पष्ट टिकट प्रणाली: टिकट में यात्रा संबंधी जानकारी का उल्लेख हो।
3. फिटनेस प्रमाण पत्र: बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के चल रही बसों को तुरंत बंद किया जाए।
4. नियमित निरीक्षण: बसों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों की कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
5. शिकायत निवारण प्रणाली: यात्रियों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
प्रशासन केवल आश्वासन देकर रह जाता है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
रीवा-चाकघाट मार्ग पर निजी बसों की मनमानी यात्रियों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। प्रशासन को जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और उचित सेवा मिल सके। यात्रियों को भी चाहिए कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और किसी भी अनियमितता की स्थिति में संबंधित विभाग को शिकायत करें।
यदि प्रशासन अब भी मूकदर्शक बना रहेगा, तो यात्रियों को सामूहिक रूप से आवाज उठाकर न्याय की मांग करनी होगी।


