महाकुंभ में अव्यवस्था की मार, गंगा स्नान से वंचित हो रहे श्रद्धालु
(विंध्य वसुंधरा समाचार स्वतंत्र पत्रकार संजय पाण्डेय रीवा 10 फरवरी 2025 रीवा मध्यप्रदेश)
वाराणसी/प्रयागराज। स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर है जब श्रद्धालुओं को उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महाकुंभ 2025 के दौरान सनातन धर्म की आस्था पर अव्यवस्था की ऐसी मार पड़ी है कि लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान से वंचित हो रहे हैं। खासतौर पर महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा भीड़ अधिक होने के कारण वापस लौटने की सलाह दी जा रही है।
प्रयागराज उत्तर प्रदेश की सीमा के चारों तरफ सनातन धर्म की सरकार है सनातन धर्म के इस महापर्व में शासन के कर्मचारियों द्वारा यात्रियों को वापस किया जा रहा है जबकि हर पर्व में यह कहा गया कि पर्व में भीड़ ज्यादा होगी पर बिना पर्व के भी यात्रियों को गंगा स्नान से वंचित होना पड़ रहा है यदि कहीं इस समय सत्ता में किसी विपक्ष की सरकार होती तो वर्तमान सत्ताधारी दल के नेता उसे विपक्ष का जीना दुर्लभ कर देते धर्म विरोधी सनातन विरोधी क्या-क्या नाम है कहा जाता धन्य विपक्ष मुक्त कुंभकर्णी निद्रा में यही नींद आपको फायदेमंद।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के कर्मचारियों द्वारा श्रद्धालुओं को समझाया जा रहा है कि कुंभ क्षेत्र में जगह नहीं है, कृपया वापस लौट जाएं। यह सुनकर दूर-दराज से पहुंचे भक्तों में निराशा फैल गई। धार्मिक आस्था से जुड़े इस महापर्व में श्रद्धालु सिर्फ स्नान और मां गंगा के दर्शन की इच्छा लेकर हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर यहां आते हैं, लेकिन भीड़ और अव्यवस्था के कारण वे गंगा स्नान से वंचित रह जा रहे हैं।
बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या ने बढ़ाई समस्या
सरकारों को यह गंभीरता से विचार करना होगा कि आने वाले वर्षों में बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या के कारण हर पर्व और त्योहार के दौरान अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ेगा। लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था और धार्मिक परंपराओं के अनुसार संगम में स्नान करने आते हैं, लेकिन भीड़ नियंत्रण की उचित व्यवस्था न होने के कारण वे अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे।
जनचर्चा यह भी हो रही है कि सरकार को ऐसे व्यापक प्रबंधन की जरूरत है, जिससे कोई भी श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और स्नान से वंचित न रहे। इसके लिए 40-50 किलोमीटर दूर बड़े पैमाने पर पार्किंग व्यवस्था और वहां से शटल बस सेवा या अन्य साधनों की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि लोग आसानी से गंगा स्नान कर सकें।
महाकुंभ: सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व, व्यवस्थाओं में सुधार जरूरी
महाकुंभ सनातन धर्म का सबसे पवित्र और बड़ा पर्व है, जो भारत में सिर्फ चार स्थानों पर आयोजित होता है। इनमें प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) का पहला स्थान है, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है। ऋषि-मुनि, देवी-देवताओं और संतों की मौजूदगी के कारण यह स्थल आध्यात्मिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण माना जाता है।
सरकार को चाहिए कि इस महान पर्व में आने वाले हर श्रद्धालु को दर्शन और स्नान की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाए। यदि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सही प्रबंधन किया जाए, तो कोई भी श्रद्धालु इस पवित्र पर्व से वंचित नहीं रहेगा और सनातन धर्म की गरिमा बनी रहेगी।



