रीवा-मऊगंज जिले में किराना व्यापार में करोड़ों की टैक्स चोरी, मिलावटखोरी और प्रशासन की अनदेखी
बिना रसीद और टैक्स चोरी से फल-फूल रहा किराना व्यापार
रीवा। जिले में किराना व्यापारियों द्वारा हर दिन करोड़ों रुपये की बिक्री की जा रही है, लेकिन शासन को मिलने वाला टैक्स निजी जेबों में जा रहा है। बिना रसीद और टैक्स चोरी के इस गोरखधंधे से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। प्रशासन की लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण के कारण यह काला कारोबार तेजी से बढ़ता जा रहा है।
गांव से लेकर शहरों तक स्थिति यह हो गई है कि जो व्यापारी तीन साल पहले सामान्य दुकान चलाते थे, वे आज बहुमंजिला इमारतों, लग्जरी गाड़ियों और करोड़ों की संपत्तियों के मालिक बन चुके हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी तेजी से संपत्ति कैसे अर्जित की गई? इसका जवाब केवल एक है—टैक्स चोरी, मिलावटी सामान की बिक्री और उपभोक्ताओं को लूटने का संगठित नेटवर्क।
मिलावटी और घटिया गुणवत्ता वाला सामान उपभोक्ताओं को ठग रहा
रीवा-मऊगंज सहित पूरे जिले में किराना दुकानों पर मिलावटखोरी और घटिया उत्पादों की बिक्री का खेल जोरों पर है। उपभोक्ताओं से अच्छी गुणवत्ता के दाम लिए जाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें निम्न गुणवत्ता का सामान दिया जाता है।
1. शक्कर – खुलेआम सल्फर युक्त शक्कर बेची जा रही है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
2. काजू-बादाम – अच्छे काजू-बादाम के नाम पर सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद बेचे जा रहे हैं।
3. साबूदाना – बढ़िया गुणवत्ता के दाम लेकर घटिया और मिलावटी साबूदाना दिया जा रहा है।
4. मसाले (धनिया, जीरा, हल्दी, मिर्च आदि) – इन सभी मसालों में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है, फिर भी प्रशासन मौन है।
पान मसाला और गुटखा का गोरखधंधा, बिना रसीद के खुलेआम बिक्री
किराना दुकानों में पान मसाला और गुटखा की बिक्री बिना रसीद के धड़ल्ले से की जा रही है। खासकर राजश्री, आग, सिग्नेचर, सरपंच जैसे ब्रांड बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहे हैं।
इन उत्पादों पर जीएसटी लागू होता है, लेकिन दुकानदार बिल नहीं काटते।
उपभोक्ता से टैक्स के पैसे तो ले लिए जाते हैं, लेकिन वह सरकार के खजाने में नहीं पहुंचता।
शहरों से लेकर गांवों तक यह समानांतर काला बाजार बन चुका है, जहां बिना टैक्स चुकाए अरबों का कारोबार हो रहा है।
ट्रकों में भरकर टैक्स चोरी वाला माल सप्लाई, पुलिस-प्रशासन मौन
सूत्रों की मानें तो रीवा से हर दिन ट्रकों में भरकर बिना टैक्स चुकाए किराना और गुटखा उत्पादों की सप्लाई हो रही है।
सबसे ज्यादा सप्लाई राजश्री गुटखा की होती है, जिसका तरीका बिल्कुल संगठित अपराध की तरह है।
ट्रक के आगे-पीछे दो बिना नंबर की गाड़ियां चलती हैं, जो प्रशासन और पुलिस की नजरों से इसे बचाती हैं।
कई बार परिवहन विभाग या पुलिस द्वारा ट्रक पकड़े भी जाते हैं, लेकिन फोन पर आदेश आते ही उन्हें छोड़ दिया जाता है।
यह पूरा खेल किसी न किसी राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।
राजनीतिक संरक्षण से व्यापारियों की बढ़ी हिम्मत
इस संगठित लूट में कई सफेदपोशों का सीधा हाथ है।
जो किराना व्यापारी इस खेल में शामिल हैं, वे किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं।ये व्यापारी सत्ता में बैठे लोगों को चंदा देकर अपने ऊपर सुरक्षा कवच बना लेते हैं।विपक्ष भी इस मामले में पूरी तरह मौन है। उसे इस लूट से कोई सरोकार नहीं है। प्रशासन के अधिकारी इन व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते हैं, क्योंकि ऊपर से दबाव बना रहता है।एक्सपायरी सामान की धड़ल्ले से बिक्री, उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ किराना दुकानों में बिस्किट, टॉफी, कुरकुरे, ब्रेड, तेल, नमकीन जैसे कई खाद्य उत्पाद एक्सपायरी हो जाने के बावजूद बेचे जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर कोई निगरानी नहीं है।
ग्राहक अनजाने में एक्सपायरी सामान खरीद रहे हैं और अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
खाद्य विभाग के अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
क्या प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा?
यह सवाल अब हर नागरिक के मन में है कि जब यह अवैध कारोबार इतनी तेजी से फल-फूल रहा है, तो प्रशासन इसे रोकने के लिए क्या कर रहा है?
क्या टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी?
क्या उपभोक्ताओं को लूटने वाले इन मिलावटखोर व्यापारियों पर शिकंजा कसा जाएगा?
क्या बिना रसीद के गुटखा और किराना सामान बेचने वालों को रोका जाएगा
क्या एक्सपायरी खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगेगी?
यदि प्रशासन, खाद्य विभाग और जीएसटी विभाग इस ओर ध्यान नहीं देता, तो यह स्पष्ट होगा कि वे भी इस खेल में शामिल हैं।
जनता से अपील
यदि आप भी इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं या आपको किराना व्यापार में टैक्स चोरी और मिलावटखोरी की जानकारी है, तो सामने आइए। मिलकर आवाज उठाएं ताकि प्रशासन पर दबाव बने और ठोस कार्रवाई हो सके।



