मेडिकल नशे का बढ़ता जाल: युवाओं की बर्बादी की दहलीज पर
गढ़ थाना क्षेत्र में खुलेआम हो रही नशीली दवाओं की बिक्री, प्रशासन की कार्यवाही बे असर मूकदर्शक
मेडिकल नशे का अवैध कारोबार गढ़ क्षेत्र में खतरनाक रूप ले चुका है। नशीली कफ सिरप, टेबलेट्स और अन्य प्रतिबंधित दवाओं की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है। इसके चपेट में सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि नाबालिग, बुजुर्ग और यहां तक कि स्कूली बच्चे भी आ रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गांवों में मेडिकल स्टोर्स के साथ-साथ चाय-पान की दुकानों और छोटे-बड़े किराना दुकानों पर भी ये दवाएं आसानी से उपलब्ध हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस मामले में निष्क्रिय क्यों है? क्या स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह व्यापार इतने बड़े पैमाने पर चल सकता है?
गढ़ पुलिस की कार्रवाई बेअसर, नए तस्कर हो रहे सक्रिय
पिछले कुछ महीनों में गढ़ पुलिस ने नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान चलाया, लेकिन इन कार्रवाइयों का असर ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया। पुराने तस्करों के पकड़े जाने के बाद अब नए गिरोह सक्रिय हो गए हैं, जो बिना किसी भय के इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यापार में अब नाबालिगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे वे खुद भी नशे की चपेट में आ रहे हैं। पुलिस के पास मुखबिरी करने वाले भी अब डरने लगे हैं, क्योंकि नशा माफिया विरोध करने वालों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दे रहा है।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा हो रही है नशीली दवाओं की बिक्री?
गढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत कई गांवों में मेडिकल नशे का जाल फैल चुका है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित इलाके हैं:
कटरा: मेडिकल नशे का सबसे बड़ा केंद्र, जहां युवाओं की लत तेजी से बढ़ रही है।
लोरी, तेंदुआ और पैकनगांव भोती डगरडुआ लालगांव : यहां नशीली दवाओं की बिक्री लगातार बढ़ रही है।
गढ़ बाजार: स्थानीय दुकानों में गुप्त रूप से नशीली दवाओं की आपूर्ति की जा रही है।
प्रशासन की लापरवाही या संरक्षण?
यह सवाल उठता है कि जब गढ़ क्षेत्र में मेडिकल नशे का कारोबार इस कदर फल-फूल रहा है, तो प्रशासन हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है? मेडिकल स्टोर्स पर इन दवाओं की सप्लाई बिना किसी रोक-टोक के हो रही है। क्या तस्करों को प्रशासनिक अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है रीवा जिले में पहले भी ‘कबड्डी मोहल्ला’ जैसी जगहें नशीले पदार्थों की वजह से बदनाम हो चुकी हैं। यदि गढ़ में जल्द ही कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह इलाका भी अपराध और नशे का अड्डा बन सकता है।
इस समस्या का समाधान क्या हो सकता है?
1. सख्त पुलिस अभियान: नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
2. मेडिकल स्टोर्स की सख्त जांच: सभी मेडिकल दुकानों पर औचक निरीक्षण हो और बिना पर्चे के नशीली दवाएं बेचने वालों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
3. जन जागरूकता अभियान: स्कूलों, कॉलेजों और पंचायतों में नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है।
4. स्थानीय लोगों की भागीदारी: यदि समाज के लोग सतर्क रहें और पुलिस को सही जानकारी दें, तो इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जा सकती है।
सरकार और प्रशासन से अपील
मेडिकल नशे का बढ़ता जाल सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकट बन चुका है। अगर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी अंधकार में डूब जाएगी। प्रशासन को चाहिए कि वह नशे के सौदागरों पर सख्ती से शिकंजा कसे और इस अवैध धंधे को जड़ से खत्म करे। अब वक्त आ गया है कि गढ़ क्षेत्र को नशा मुक्त बनाने के लिए सभी लोग एकजुट हों और प्रशासन को मजबूर करें कि वह अपनी जिम्मेदारी को निभाए।



