रीवा: होटलों में गड़बड़ियों पर प्रशासन की नजर, सख्त कार्रवाई जारी
रीवा/। संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर के आदेश के बाद खाद्य विभाग और नापतौल विभाग की जांच शुरू होने से होटलों और ढाबों में व्याप्त अनियमितताओं का पर्दाफाश हो रहा है। लेकिन जांच के नाम पर सेवा शुल्क की वसूली की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं, जिससे प्रशासन की छवि प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार गलत कार्यों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की नीति अपनाई जानी चाहिए, लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो रहा है?
नाबालिगों से काम, श्रम विभाग बना मूकदर्शक
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक होटलों और दुकानों में नाबालिग बच्चों से काम कराया जा रहा है, जो साफ तौर पर बाल श्रम कानून का उल्लंघन है। इसके बावजूद श्रम विभाग की निष्क्रियता चिंता का विषय बनी हुई है। प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है, जिससे बाल श्रम को खुला संरक्षण मिल रहा है।
हाईवे पर हो रही अवैध वसूली, ग्राहकों से मनमानी कीमत वसूली
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर संचालित ढाबों और होटलों में ग्राहकों से एमआरपी से अधिक दरों पर वस्तुएं बेची जा रही हैं। जांच में यह सामने आया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है। प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से लाया गया घटिया दही और निम्न गुणवत्ता वाले रसगुल्ले खुलेआम बेचे जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के होटलों में भी ऐसे ही पदार्थों की बिक्री जारी है, जिससे लोगों की सेहत खतरे में पड़ रही है।
लाखों की कमाई, लेकिन कर चोरी का अंदेशा
सूत्रों के अनुसार, कई होटल और ढाबे प्रतिदिन लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं, लेकिन अपनी वास्तविक आय को छुपा रहे हैं। वाणिज्य कर विभाग को इन होटलों का ब्योरा खंगालकर टैक्स चोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। पारदर्शी आय विवरण प्रस्तुत न करने वाले होटलों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि सरकारी राजस्व की क्षति रोकी जा सके।
खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल: मिलावटी अरहर दाल परोसी जा रही
होटलों में मिलावटी अरहर की दाल परोसे जाने की खबरों से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। कुछ समय पहले 140 रुपये प्रति किलो बिकने वाली अरहर दाल अब 110-120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि बाजार में 70-80 रुपये किलो की मिलावटी दालें भी धड़ल्ले से बिक रही हैं। कई होटल संचालक इन्हीं सस्ती दालों का उपयोग कर ग्राहकों को परोस रहे हैं, जिससे आमजन की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।
प्रशासन को निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई करनी होगी
इन तमाम गड़बड़ियों के बीच सवाल उठता है कि क्या जिला कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी दोषी विभागों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे? क्या केवल आदेश जारी कर देने से स्थिति सुधर जाएगी, या फिर जमीनी स्तर पर कड़ी कार्रवाई होगी?
ज़रूरत है कि प्रशासन सभी संबंधित विभागों की गोपनीय जांच कर यह सुनिश्चित करे कि गलत कार्यों में लिप्त कोई भी व्यक्ति बचने न पाए। चाहे वह छोटा व्यापारी हो या बड़ा कारोबारी, दोषियों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
यदि संबंधित विभाग समय रहते सक्रिय होते, तो होटल व्यवसाय से जुड़े अनियमितताओं पर पहले ही रोक लगाई जा सकती थी। अब देखना यह होगा कि श्रम विभाग और वाणिज्य कर विभाग कितनी तत्परता दिखाते हैं और जिला प्रशासन इन अनियमितताओं को खत्म करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।



