टोल प्लाजा पर नियमों का उल्लंघन: घंटों जाम में फंसे यात्री, जिम्मेदार कौन?
सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के बावजूद देशभर के कई टोल प्लाजा पर यात्रियों को अनावश्यक जाम का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर धार्मिक आयोजनों, मेले या पर्वों के दौरान यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। हाल ही में संपन्न कुंभ स्नान के दौरान कई टोल प्लाजा पर यात्रियों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
सरकारी नियम क्या कहते हैं?
भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आदेशानुसार, यदि किसी वाहन को टोल प्लाजा से गुजरने में तीन मिनट से अधिक समय लगता है, तो उसे टोल टैक्स अदा करने से छूट मिलनी चाहिए। इसके अलावा, यदि टोल प्लाजा पर लंबी कतारें लगी हैं और जाम की स्थिति बनी हुई है, तो सभी वाहनों को बिना किसी शुल्क के आगे बढ़ने देना चाहिए।
हालांकि, वास्तविकता इसके ठीक विपरीत देखने को मिल रही है। कई टोल प्लाजा पर यात्रियों को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है और घंटों जाम में फंसाए जाने के बावजूद उनसे टोल वसूला जा रहा है। यह न केवल सरकार के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का हनन भी है।
सीसीटीवी फुटेज से होनी चाहिए जांच
हर टोल प्लाजा पर सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं, जिनका उपयोग यह देखने के लिए किया जाना चाहिए कि कौन-सा वाहन कितने समय तक रुका रहा। प्रशासन को चाहिए कि वह इन फुटेज की नियमित समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि टोल ऑपरेटर नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
यदि कोई वाहन तीन मिनट से अधिक समय तक टोल पर खड़ा रहा है, तो उससे टोल वसूला जाना नियमों के खिलाफ है। इस बात की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए कि किन टोल प्लाजा पर नियमों का उल्लंघन किया गया और संबंधित टोल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में विशेष व्यवस्था क्यों नहीं?
कुंभ जैसे बड़े आयोजनों में लाखों श्रद्धालु देशभर से यात्रा करते हैं। ऐसे समय में टोल प्लाजा पर अतिरिक्त व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि यात्रियों को बेवजह फंसने से रोका जा सके। सरकार को निम्नलिखित उपायों पर विचार करना चाहिए:
1. अस्थायी टोल छूट – विशेष धार्मिक या राष्ट्रीय आयोजनों के दौरान टोल टैक्स माफ किया जाना चाहिए।
2. अतिरिक्त लेन की व्यवस्था – हाईवे अथॉरिटी को चाहिए कि ऐसे मौकों पर टोल प्लाजा पर अस्थायी अतिरिक्त लेन जोड़े।
3. मॉनिटरिंग टीम की तैनाती – प्रशासन को चाहिए कि वह विशेष निगरानी दल बनाए जो टोल प्लाजा पर यातायात को नियंत्रित करें और नियमों के पालन को सुनिश्चित करें।
4. फास्टैग अनिवार्यता की समीक्षा – कई बार फास्टैग स्कैनिंग में देरी होती है, जिससे जाम की स्थिति बनती है। सरकार को चाहिए कि इन समस्याओं का समाधान निकाले।
यात्रियों के अधिकार और शिकायत का तरीका
यदि कोई यात्री टोल प्लाजा पर अनुचित रूप से रोका जाता है या उससे गलत तरीके से टोल वसूला जाता है, तो वह निम्नलिखित माध्यमों से शिकायत कर सकता है:
NHAI हेल्पलाइन (1033) पर कॉल करके
NHAI के ग्रिवांस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर
राज्य परिवहन विभाग को ईमेल या लिखित शिकायत देकर
जनता दर्शन पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर
जिम्मेदार कौन?
यह सवाल बेहद अहम है कि यदि सरकार ने स्पष्ट नियम बनाए हैं, तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा? टोल ऑपरेटरों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और प्रशासन को चाहिए कि वह आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से ले। यदि सरकार ने तीन मिनट से अधिक प्रतीक्षा करने वाले वाहनों के लिए टोल माफी का नियम बनाया है, तो इसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।


