महाशिवरात्रि पर महाकुंभ में श्रद्धालुओं का जनसैलाब, प्रशासन ने किए अभूतपूर्व इंतजाम
श्रद्धालुओं से संगम पर भीड़ न लगाने की अपील, नजदीकी घाटों पर कर सकेंगे पुण्य स्नान
(शैलेन्द्र मिश्रा)(विंध्य वसुंधरा समाचार प्रयागराज 26 फरवरी 2025)
प्रयागराज: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर महाकुंभ का अंतिम स्नान बुधवार को श्रद्धा और आस्था के अपार उत्साह के साथ संपन्न हो रहा है। देशभर से आए करोड़ों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़े हैं। सुबह से ही स्नान के लिए घाटों पर लंबी कतारें देखी गईं। संगम की ओर जाने वाली सड़कों पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण प्रशासन को कुछ समय के लिए रास्ता रोकना पड़ा।प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अव्यवस्था से बचने के लिए श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे संगम के बजाय नजदीकी घाटों पर स्नान करें। प्रयागराज और महाकुंभ नगर में भीड़ प्रबंधन को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी वीवीआईपी प्रोटोकॉल रद्द कर दिए गए हैं, जिससे हर श्रद्धालु को समान रूप से स्नान और दर्शन का लाभ मिल सके।
महाशिवरात्रि पर अब तक 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने किया स्नान
बुधवार दोपहर तक प्रयागराज में दोपहर तक में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके थे। हर ओर "हर हर महादेव" और "गंगा मैया की जय" के उद्घोष गूंज रहे हैं।संगम तट पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष रणनीति अपनाई है। श्रद्धालुओं को तीन जोन में विभाजित किया गया है, जहां उन्हें अलग-अलग स्थानों पर स्नान कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी घाट पर अत्यधिक भीड़ न हो।
महाशिवरात्रि स्नान का विशेष मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त में 3:33 बजे से 5:57 बजे तक का समय महाशिवरात्रि स्नान के लिए सबसे शुभ माना गया। इस दौरान संगम और अन्य घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मुहूर्त में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पाप समाप्त हो जाते हैं।संगम में स्नान के बाद श्रद्धालु गंगा किनारे दान-पुण्य भी कर रहे हैं। इस दिन अन्न, वस्त्र और स्वर्ण दान को विशेष फलदायी माना गया है।
शहर के प्रमुख शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना
महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रयागराज के प्रमुख शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किए जा रहे हैं। मनकामेश्वर मंदिर, नागवासुकी मंदिर, दशाश्वमेध मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, पडिला महादेव और नागेश्वर धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। इन मंदिरों में श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।मंदिर प्रबंधन ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी श्रद्धालुओं को सुविधाजनक तरीके से भगवान शिव का जलाभिषेक और दर्शन करने का अवसर मिले।
प्रयागराज को बनाया गया ‘नो व्हीकल जोन’, रेलवे की विशेष तैयारियां
महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयागराज और महाकुंभ नगर को ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया है। शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है, जिससे श्रद्धालुओं को पैदल चलने में कोई असुविधा न हो।रेलवे ने भी महाशिवरात्रि स्नान को देखते हुए 170 विशेष ट्रेनों सहित कुल 4000 से अधिक ट्रेनें चलाई हैं। इससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को प्रयागराज पहुंचने में आसानी हो रही है।
श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा
श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का सम्मान करते हुए प्रशासन द्वारा त्रिवेणी संगम पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराई जा रही है। यह दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत भावनात्मक और अविस्मरणीय अनुभव बन गया।हजारों श्रद्धालु जब संगम में डुबकी लगा रहे थे, उसी समय आकाश से गुलाब और गेंदा के फूलों की वर्षा होने लगी। श्रद्धालुओं ने इसे महादेव का आशीर्वाद माना और "हर हर महादेव" के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
महाकुंभ के अंतिम दिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
महाकुंभ के अंतिम स्नान पर्व पर किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए 37,000 पुलिसकर्मी, 14,000 होमगार्ड, 2,750 एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे, जल पुलिस स्टेशन और वॉच टावर तैनात किए गए हैं।इसके अलावा, ड्रोन कैमरों से भीड़ पर नजर रखी जा रही है, जिससे भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
महाकुंभ: आस्था, एकता और समर्पण का संगम
महाकुंभ न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक एकता और आस्था का अनूठा संगम है। यहां किसी जाति, धर्म या संप्रदाय का भेदभाव नहीं होता—हर कोई एक समान श्रद्धा और विश्वास के साथ संगम में स्नान करने पहुंचता है।यह पर्व न केवल आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है, बल्कि यह दुनिया को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की विशालता से भी परिचित कराता है। महाशिवरात्रि का यह महापर्व श्रद्धालुओं के लिए आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का अद्भुत अवसर लेकर आया है।

