राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ती दुर्घटनाएँ: प्रशासन की घोर लापरवाही या मिलीभगत?
रीवा जिले सहित पूरे मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाएँ आम हो गई हैं। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग 30 और 35 पर रोज़मर्रा की दुर्घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि प्रशासन, सड़क निर्माण कंपनियाँ और टोल प्लाजा प्रबंधन अपनी ज़िम्मेदारियों का सही से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। इन सड़कों का निर्माण तेज़ गति वाले वाहनों के सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखकर किया जाता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यहाँ कई सुरक्षा उपायों की भारी अनदेखी हो रही है।
रीवा जिले में दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति
रीवा से लेकर चाकघाट तक और मनगवा से हनुमना तक के राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। इन सड़कों पर अनियंत्रित कट, अवैध रूप से तोड़े गए डिवाइडर, अधूरे पुल और स्पष्ट संकेतकों की कमी के कारण प्रतिदिन गंभीर हादसे हो रहे हैं। प्रशासन और सड़क निर्माण कंपनियों की अनदेखी का नतीजा यह है कि न केवल गाड़ियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि हजारों परिवारों के चिराग बुझ रहे हैं।
खतरनाक सड़कें और प्रमुख दुर्घटना-स्थल
रीवा जिले में कई स्थान दुर्घटनाओं के लिए ‘ब्लैक स्पॉट’ बन चुके हैं, जहाँ आए दिन हादसे हो रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं:
1. धारा, विभा गढ़ – यहाँ डिवाइडर को अवैध रूप से तोड़ दिया गया है, जिससे वाहनों की टक्कर आम हो गई है।
2. धारा बीघा ब्रिज – यह ब्रिज वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है, जिसके कारण दुर्घटनाएँ हो रही हैं।
3. गढ़ नईगढ़ी मार्ग – इस मार्ग पर एक अधूरा पुल कई वर्षों से खतरनाक स्थिति में है।
4. बालाजी ढाबा के थोड़ा आगे– सड़क पर डिवाइडर बीच से टूटा हुआ है, जिससे रात के समय भारी वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना रहती है।
5. पंजाबी ढाबा के पास – सड़क निर्माण कंपनियों और स्थानीय दुकानदारों की लापरवाही के कारण यहाँ डिवाइडर तोड़ दिया गया है, जिससे रोज़ नए हादसे हो रहे हैं।
6. कलवारी ब्रिज बायपास – यह महत्वपूर्ण मार्ग वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।
प्रशासन की उदासीनता: कौन है जिम्मेदार?
कुंभ मेले के दौरान इन मार्गों पर वाहनों की संख्या प्रति घंटे 1,000 से 1,400 तक वाहन निकल रहे हैं। इतनी भारी संख्या में वाहनों के चलने के बावजूद सड़क सुरक्षा उपायों का घोर अभाव देखा गया।
हाइवे पर प्रतीक चिन्ह जैसे हॉस्पिटल स्कूल रोड़ क्रॉस आदि
हाइवे के किनारे स्थित होटलों और ढाबों पर पार्किंग के अभाव के बावजूद भी इनको लाइसेंस कैसे दिया गया
पटरियों पर खड़े वाहन के कारण दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि
सड़क निर्माण कंपनियों को 30 वर्षों तक रोड रखरखाव की ज़िम्मेदारी दी जाती है, लेकिन वे केवल टोल टैक्स वसूलने पर ध्यान देती हैं।
पेट्रोलिंग करने वाली टीमें केवल कागज़ों पर सक्रिय रहती हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
ठेकेदारों, टोल प्लाजा प्रबंधन और प्रशासन की मिलीभगत के कारण कई महत्वपूर्ण पुल और सड़कें वर्षों से अधूरी पड़ी हैं।
अवैध रूप से डिवाइडर तोड़कर क्रॉसिंग बना दी जाती है, जिससे सड़क पर चलने वाले तेज़ गति के वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
टोल प्लाजा और ठेकेदारों की भूमिका पर सवाल
इन सड़कों पर मौजूद टोल प्लाजा भारी मात्रा में ₹80 से लेकर ₹400 तक की वसूली कर रहे हैं, लेकिन सड़क की स्थिति दयनीय बनी हुई है। यदि सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क नियमों के तहत वसूला भी जा रहा है, तब भी टोल प्लाजा प्रबंधन की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे सड़क की मरम्मत और सुरक्षा उपायों का सही क्रियान्वयन करें।लेकिन वास्तविकता यह है कि टोल प्लाजा के कर्मचारी और सड़क निर्माण कंपनी के ठेकेदार केवल वसूली में लगे हुए हैं और सड़क की हालत सुधारने की कोई योजना नहीं बना रहे हैं। यदि इन कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, तो दुर्घटनाओं की संख्या में 50% तक की कमी लाई जा सकती है।
सरकार को क्या करना चाहिए?
रीवा जिले के पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने हाल ही में चाकघाट तक सड़क दुर्घटनाओं के खतरनाक स्थानों का निरीक्षण किया। लेकिन सिर्फ निरीक्षण करने से समस्या हल नहीं होगी। मध्य प्रदेश सरकार और संभागीय आयुक्त को एक विशेष जांच दल गठित करना चाहिए, जो इन दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का पता लगाए और संबंधित ठेकेदारों, टोल प्लाजा कर्मचारियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे।
बीमा कंपनियों की भूमिका और सरकार की जवाबदेही
बीमा कंपनियाँ भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के पालन की समीक्षा करें। यदि सड़क निर्माण कंपनियाँ और प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाते, तो बीमा कंपनियाँ दुर्घटनाओं में हुए नुकसान का मुआवजा देने से इनकार कर सकती हैं। इससे सरकार पर दबाव बनेगा कि वह सड़कों की गुणवत्ता में सुधार करे।
अब और लापरवाही नहीं!
रीवा जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति गंभीर और चिंताजनक है। जब तक सरकार और प्रशासन इस ओर कठोर कदम नहीं उठाते, तब तक सड़क दुर्घटनाएँ नहीं रुकेंगी।
सड़क निर्माण कंपनियों के ठेके की समीक्षा की जानी चाहिए।
अवैध रूप से कटे डिवाइडर और अधूरे पुलों को तुरंत दुरुस्त किया जाना चाहिए।
सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस और निगरानी दलों को ज़िम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए।
टोल प्लाजा से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग सड़क सुरक्षा उपायों के लिए किया जाना चाहिए।
अब समय आ गया है कि सरकार, प्रशासन और जनता इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए मिलकर कदम उठाएँ, ताकि अनगिनत अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सके। किन्तु शासन और प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद ही जागता है और खाना पूर्ती के बाद फिर से ठंडा हो जाता है



