लालगांव पुलिस लाखों की चोरी का खुलासा करने में नाकाम, पीड़ितों ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई
गढ़, रीवा: गढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत बांस में एक बड़ी चोरी की वारदात सामने आई है, लेकिन लालगांव पुलिस अब तक इस गूढ़ मामले का खुलासा करने में विफल रही है। इस लापरवाही से क्षेत्र में रोष और चिंता का माहौल है।
घटना का संक्षिप्त विवरण:
7 फरवरी की रात ग्राम बांस निवासी आशीष पटेल के घर में अज्ञात चोरों ने सेंध लगाई। यह वारदात उस समय हुई जब आशीष पटेल और उनके परिवार के सदस्य प्रयागराज में महाकुंभ गंगा स्नान के लिए गए हुए थे। इस अवसर का फायदा उठाते हुए चोरों ने उनके सूने घर में प्रवेश किया और सोने-चांदी के आभूषणों समेत नगदी लेकर फरार हो गए।
अगले दिन सुबह जब परिवार के सदस्य गंगा स्नान से वापस लौटे, तो उन्होंने घर के दरवाजे को टूटा हुआ पाया। घर के अंदर का दृश्य देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए। पूरा सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था और कीमती वस्तुएं गायब थीं। इस दर्दनाक स्थिति में परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और एफआईआर दर्ज करवाई।
पुलिस की भूमिका पर सवाल:
पुलिस ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अगले ही दिन उन्हें बिना किसी ठोस जांच के छोड़ दिया। इस घटना से पीड़ित परिवार को पुलिस की निष्क्रियता और लापरवाही पर संदेह उत्पन्न हुआ।
ग्राम पंचायत बांस के सरपंच कमलेश पटेल ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चोरी होने के बावजूद पुलिस अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, जिससे क्षेत्र में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यदि पुलिस इसी तरह लचर रवैया अपनाती रही, तो अपराधियों के हौसले और बुलंद हो जाएंगे।
उच्चाधिकारियों से न्याय की मांग:
चोरी के इस बड़े मामले में अब पीड़ित परिवार और ग्रामवासी पुलिस अधीक्षक रीवा से हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। उनका आग्रह है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़कर सख्त सजा दी जाए।
इस घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की अपील कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और दोषियों को जल्द पकड़ा जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।






