शिवमहापुराण कथा का आठवां दिन: महामृत्युंजय शिव के नाम जप से मिलती है मुक्ति
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा, मप्र | 23 फरवरी 2025
मध्यप्रदेश के रीवा जिले के पावन यज्ञस्थली कैथा हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण में आयोजित 11 दिवसीय श्रीशिवमहापुराण महायज्ञ का आठवां दिवस भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धर्माचार्य डॉ. गौरीशंकर शुक्ला जी के पवित्र मुखारविंद से प्रवाहित अमृतमयी शिवमहापुराण कथा की अविरल धारा ने भक्तों को आध्यात्मिक आनंद और शिव तत्व के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराया। इस दिव्य आयोजन से सम्पूर्ण क्षेत्र शिवमय होकर भगवान शिव की लीलाओं में सराबोर रहा।
ईश्वर के विभिन्न स्वरूपों में एकत्व भाव आवश्यक
आचार्य डॉ. गौरीशंकर शुक्ला जी ने प्रवचन के दौरान समझाया कि ईश्वर एक हैं, किंतु उनकी आराधना विभिन्न स्वरूपों में की जाती है। ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता, विष्णु पालनकर्ता और शिव संहारकर्ता हैं, लेकिन यह तीनों ही एक ही परम तत्व के विभिन्न रूप हैं। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु स्वयं शिव नाम का जाप करते हैं और शिवजी ने भी विष्णु सहस्रनाम का जप किया था। इस संदर्भ में जब देवी पार्वती ने शिवजी से प्रश्न किया कि कोई साधारण व्यक्ति इतने नामों का जाप कैसे कर सकता है, तब भगवान शिव ने उत्तर दिया कि राम नाम का जाप ही सर्वोत्तम है। उन्होंने कहा कि राम ही उनके परम आराध्य हैं। यह दर्शाता है कि सभी देवताओं के नाम और स्वरूप भिन्न हो सकते हैं, किंतु सभी एक ही परमतत्व के अभिन्न अंग हैं। इसलिए, किसी भी इष्ट की उपासना करते समय अन्य देवताओं के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का भाव रखना चाहिए।
महामृत्युंजय शिव के नाम जप से जन्म-मरण के बंधन समाप्त होते हैं
आचार्य जी ने बताया कि भगवान शिव अनादि, परमब्रह्म और चिदानंद स्वरूप हैं। उनका पंचाक्षर मंत्र "नमः शिवाय" अत्यंत प्रभावशाली और मोक्ष प्रदायक है। इस महामंत्र के जप से व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यह संसार ही नरक के समान है, जहाँ जीव आधिभौतिक (शारीरिक कष्ट), आधिदैविक (दैवीय आपदाएँ) और आध्यात्मिक (अज्ञानजन्य दुख) त्रिविध तापों से ग्रसित रहता है। मृत्यु का भय व्यक्ति को सदैव व्याकुल किए रहता है, लेकिन शिव नाम का निरंतर स्मरण करने से यह भय समाप्त हो जाता है। भगवान शिव के असंख्य नामों में महामृत्युंजय नाम विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसका अर्थ है – मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला। अतः जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण भाव से शिव का ध्यान करता है, वह इस संसार रूपी भवसागर से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
शिवमहापुराण महायज्ञ: समापन 26 फरवरी को
हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण, कैथा में चल रहा यह दिव्य आयोजन 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर संपन्न होगा। इस दिन विशाल हवन एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को ससम्मान आमंत्रित किया गया है।
इस महायज्ञ में भक्तों को भगवान शिव की अनंत कृपा प्राप्त करने और आध्यात्मिक उन्नति करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हो रहा है। शिवमहापुराण कथा का यह दिव्य प्रवाह आध्यात्मिक चेतना को जागृत कर जीवन को शिवमय बनाने का एक श्रेष्ठ मार्गदर्शन कर रहा है।




