रीवा-प्रयागराज मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें, तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन मुस्तैद
दोपहर 2:30 बजे से जाम खुल गया है मनगवा तक जाम नहीं लगा है सभी वाहनों को जाने दिया जा रहा है
(विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा संजय पाण्डेय दिनांक 10 फरवरी 2025)
भारत में लगातार बढ़ती जनसंख्या और राष्ट्रीय राजमार्गों का सीमित विस्तार अब तीर्थयात्राओं के दौरान एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। वर्तमान में देश की अनुमानित जनसंख्या 2024 में 145 करोड़ के आसपास है, और सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों श्रद्धालु धार्मिक परंपराओं का पालन करने के लिए विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा करते हैं। प्रयागराज में गंगा स्नान और कुंभ जैसे महापर्वों में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है।10 फरवरी 2025 की सुबह भी रीवा-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर हजारों वाहन जाम में फंसे नजर आए। रात 3 बजे तक रुके हुए वाहनों को निकाला गया था, लेकिन सुबह 5 बजे से फिर वाहनों को रोकने की नौबत आ गई। रीवा जिले का प्रशासन, संभागीय आयुक्त और अन्य कर्मचारी दिन-रात व्यवस्था सुधारने में जुटे हैं, फिर भी भीड़ नियंत्रण में नहीं आ रही।
प्रयागराज में पार्किंग की समस्या बनी सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि रीवा-प्रयागराज मार्ग फोर-लेन हाईवे के रूप में विकसित हो चुका है, लेकिन प्रयागराज में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने के कारण तीर्थयात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। लाखों श्रद्धालु अपने वाहनों से प्रयागराज पहुंच रहे हैं, लेकिन पार्किंग स्थलों की सीमित क्षमता के कारण प्रशासन को वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करनी पड़ रही है।
जैसे ही पार्किंग स्थल खाली होते हैं, तभी नए वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है।
इसका उद्देश्य सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना है, ताकि भीड़ के कारण कोई दुर्घटना न हो।लेकिन, भीड़ इतनी अधिक है कि इस प्रक्रिया से भी जाम की स्थिति लगातार बनी हुई है।
यात्रियों की सुविधाओं के लिए किए गए प्रशासनिक प्रयास
प्रयागराज में भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों को सुविधाएँ देने के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों का प्रशासन लगातार काम कर रहा है।
पुलिस और प्रशासनिक अमला जगह-जगह तैनात किया गया है।
भोजन और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन जरूरत से कम साबित हो रही हैं।रीवा से प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं को यातायात नियमों का पालन करने और प्रशासन के निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।
अप्रत्याशित भीड़ से बढ़ी परेशानी
आमतौर पर अमावस्या और बसंत पंचमी जैसे विशेष पर्वों पर प्रयागराज में तीर्थयात्रियों की भीड़ उमड़ती है। लेकिन इस बार, मुख्य पर्वों के समाप्त होने के बाद भी तीर्थयात्रियों का प्रवाह नहीं रुका है।
इस बार की तीर्थ यात्रा में भीड़ के इतने लंबे समय तक बने रहने का अनुमान प्रशासन ने पहले नहीं लगाया था।होटल, धर्मशालाएँ और प्रशासनिक भोजनालय क्षमता से अधिक भरे हुएहैं।भीड़ नियंत्रण को लेकर किए गए प्रयास अपेक्षा के अनुरूप सफल नहीं हो रहे।
मध्य प्रदेश सरकार की सक्रियता
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को लेकर लगातार अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं। वे संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और अन्य संबंधित अधिकारियों से पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि गंगा स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकें।हालांकि, सीमावर्ती राज्यों से आने वाले यातायात संबंधी निर्देशों को लागू करना सरकार की बाध्यता भी है, जिससे कई बार प्रशासन के प्रयास सीमित हो जाते हैं।
बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता
प्रयागराज में श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि मौजूदा बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता है।राष्ट्रीय राजमार्गों को और चौड़ा किया जाना चाहिए ताकि भारी यातायात को संभाला जा सके।
प्रयागराज में अतिरिक्त पार्किंग स्थलों का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे तीर्थयात्रियों को परेशानी न हो।
तीर्थ स्थलों पर यात्रियों की अनुमानित संख्या के आधार पर पूर्व नियोजन की नीति अपनाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं को टाला जा सके प्रशासन अपनी पूरी क्षमता से प्रयास कर रहा है, लेकिन तीर्थयात्रियों की संख्या जिस अनुपात में बढ़ रही है, उसे देखते हुए स्थायी समाधान की जरूरत है।




