गांव में मातम, एक साथ जलीं तीन चिताएं भीषण सड़क हादसे में गई तीन जानें, अंतिम यात्रा में उमड़ा जन सैलाब
ग्राम मोजरा (ग्राम पंचायत गढ़, तहसील मनगवा, थाना गढ़) |
गांव मोजरा में आज का दिन कभी न भूलने वाला रहा। सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले तीन लोगों की एक साथ अर्थियां उठीं, तो पूरे गांव में मातम छा गया। माहौल इतना गमगीन था कि हर आंख नम थी, हर दिल बोझिल था।
बीते दिन ग्राम अगड़ाल कटरा से गढ़ की ओर जा रही एक अर्टिगा कार भीषण हादसे का शिकार हो गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में अच्छे लाल पटेल (45 वर्ष), बृजेंद्र पटेल (43 वर्ष) और लवकुश पटेल (20 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और हर तरफ सन्नाटा पसर गया।
सुबह 10:30 बजे जब एक ही घर से तीन अर्थियां उठीं, तो गांव का हर शख्स स्तब्ध रह गया। सड़कें आंसुओं और क्रंदन से भीग गईं। मृतकों के परिवारों की चीत्कार ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आत्मा को झकझोर कर रख दिया।
घर से उठीं तीन अर्थियां, फूट-फूटकर रोए परिजन
मृतकों की पहचान:
1. अच्छे लाल पटेल (45 वर्ष) – पिता सुरुद्दीन पटेल
2. बृजेंद्र पटेल (43 वर्ष) – पिता श्रीनिवास पटेल
3. लवकुश पटेल (20 वर्ष) – पिता गेंदलाल पटेल
जब अच्छे लाल पटेल के पुत्र अभिषेक पटेल उर्फ पिंटू और बृजेंद्र पटेल के पुत्र शनि उर्फ अमित (18 वर्ष) ने अपने-अपने पिता की अर्थियों को कंधा दिया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक पड़ीं।
गांव के बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चे तक सभी इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर भावुक हो गए। अंतिम यात्रा में न केवल गांव मोजरा, बल्कि आसपास के गांवों से भी हजारों लोग शामिल हुए।
श्मशान घाट पर एक साथ जलीं तीन चिताएं, गूंजे विलाप के स्वर
गांव के श्मशान घाट पर जब तीनों चिताएं एक साथ सजाई गईं, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल दहल गया।
अभिषेक पटेल उर्फ पिंटू ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
शनि उर्फ अमित ने अपने पिता को अग्नि दी।
लवकुश पटेल के छोटे भाई ने उनकी चिता को अग्नि दी।
एक साथ उठी चिताओं की लपटों ने मानो पूरे गांव की खुशियों को भी जला दिया। माहौल इतना गमगीन था कि हर ओर सिर्फ परिजनों के विलाप और चिताओं की चटकती लकड़ियों की आवाज गूंज रही थी।
भीषण हादसे ने छीन लीं तीन जिंदगियां
ग्राम अगड़ाल कटरा से गढ़ की ओर आ रही अर्टिगा कार बीते दिन हादसे का शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मवेशी को बचाने की वजह से कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। गांव में यह खबर पहुंचते ही मातम पसर गया। जिन लोगों ने कुछ दिन पहले इन मृतकों को हंसते-बोलते देखा था, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहे।
गांव में पसरा मातम, हर घर में सन्नाटा
जहां पहले गलियों में बच्चों की हंसी सुनाई देती थी, वहां अब सिसकियों की आवाजें गूंज रही हैं।
जिन घरों में पहले खुशियों का माहौल था, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
गांव का हर व्यक्ति इस दुख को अपने दिल में महसूस कर रहा है।
गांव के एक बुजुर्ग ने कहा,
"हमने अपने जीवन में कभी ऐसा मंजर नहीं देखा था। एक साथ तीन अर्थियां उठती देख हमारा कलेजा फट गया। भगवान ऐसी घड़ी किसी पर न लाए।"
गांव के लोगों ने एकत्र होकर परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से संबल देने का संकल्प लिया।
हर कोई यह सुनिश्चित करने में जुटा था कि इस कठिन समय में परिवार अकेला महसूस न करे।
गांव की आंखों में हमेशा के लिए बस गया यह मंजर
यह हादसा गांव के इतिहास में सबसे दुखद घटनाओं में से एक बन गया है।
लोगों के दिलों में यह मंजर हमेशा के लिए छप गया है। हर किसी की जुबां पर बस एक ही बात है –
"किसी ने नहीं सोचा था कि यह दिन भी देखना पड़ेगा।"
गांव के लोग अब भगवान से मृतकों की आत्मा की शांति और परिवार को इस असीम दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना कर रहे हैं।
"भगवान दिवंगत आत्माओं को शांति दे और शोकाकुल परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।"



