मऊगंज हिंसा: एएसआई रामचरण गौतम को शहीद का दर्जा, परिवार को एक करोड़ की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी
विंध्य वसुंधरा समाचार | रीवा, मऊगंज (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले में शनिवार को हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए एएसआई रामचरण गौतम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "शहीद" का दर्जा देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने उनके परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया है। यह घटना राज्य में कानून व्यवस्था की गंभीर चुनौती बन गई है, जिस पर सरकार ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
कैसे हुई यह भयावह घटना?
शनिवार को मऊगंज में आदिवासी समुदाय के लोगों ने एक युवक शनि द्विवेदी को बंधक बना लिया और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। जैसे ही इस घटना की सूचना पुलिस को मिली, मऊगंज पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन वहां पहले से मौजूद करीब 200 से अधिक आक्रोशित ग्रामीणों ने अचानक पुलिस पर हमला बोल दिया। डंडे और पत्थरों से किए गए इस हमले में एएसआई रामचरण गौतम गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में थाना प्रभारी, तहसीलदार सहित कई पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद सरकार और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद प्रदेश सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए मृतक एएसआई के परिवार को सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि—
"शहीद एएसआई रामचरण गौतम ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके परिवार को राज्य सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी और उनके एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाएगी। "इसके अलावा, राज्य के उच्च अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजा गया। प्रभारी मंत्री, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर (रीवा संभाग), आईजी, कलेक्टर और एसपी ने घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया।
शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
शहीद एएसआई रामचरण गौतम का पार्थिव शरीर उनके गृह जिले सतना ले जाया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान कलेक्टर, एसपी, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल और स्थानीय लोग मौजूद रहे। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी गई और पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
हिंसा के दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस हिंसा के दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। पुलिस ने इस मामले में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और आगे की जांच जारी है।
प्रदेश में कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
मऊगंज की यह हिंसक घटना प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। पुलिस प्रशासन अब इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रहा है। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर गंभीर आक्रोश है और सरकार से न्याय की मांग की जा रही है। शहीद एएसआई रामचरण गौतम की शहादत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। सरकार ने उनके परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरी देने की घोषणा कर उनकी कुर्बानी को सम्मान दिया है, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है— क्या पुलिस बल भविष्य में इस तरह के हमलों से बचाव के लिए अधिक सशक्त होगा?


