विद्युत विभाग की लापरवाही बड़ी दुर्घटनाओं को दे रही न्योता
सड़क किनारे खुले तार और जर्जर ट्रांसफार्मर बना रहे खतरा, प्रशासन कब देगा ध्यान?
रीवा जिले में विद्युत मंडल की लापरवाही लगातार बढ़ती जा रही है। जिलेभर में कई स्थानों पर बिजली के खुले तार, ढीले कनेक्शन और असुरक्षित ट्रांसफार्मर हादसों को आमंत्रित कर रहे हैं। इन खतरों के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे आमजन की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। खासकर, गढ़-नईगढ़ी मार्ग की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां सड़क किनारे लगे ट्रांसफार्मर और खुले तार दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।
सड़क किनारे लगे ट्रांसफार्मर मौत को दे रहे आमंत्रण
गढ़-नईगढ़ी मार्ग पर कोनों और सार्वजनिक स्थलों के पास लगे ट्रांसफार्मर और बिजली के खुले तार बड़ी समस्या बन गए हैं। गर्मी का मौसम नजदीक आते ही आगजनी की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इन असुरक्षित ट्रांसफार्मरों की वजह से बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं। जब प्रमुख सड़कों पर इस तरह की लापरवाही देखने को मिल रही है, तो ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी दयनीय हो सकती है।
गर्मी में बढ़ सकता है आगजनी का खतरा
बिजली की खराब व्यवस्था और खुले तारों की वजह से पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। गर्मियों में बिजली की अधिक खपत होती है, जिससे ट्रांसफार्मर पर भार बढ़ जाता है। जर्जर तारों और लूज कनेक्शन की वजह से शॉर्ट सर्किट और आगजनी की घटनाएं अधिक होती हैं। यदि समय रहते इनकी मरम्मत नहीं की गई तो इस बार भी जन-धन की भारी हानि हो सकती है।
जनप्रतिनिधि और प्रशासन करें कार्रवाई
रीवा जिले के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को चाहिए कि वे विद्युत विभाग पर दबाव बनाएं और जल्द से जल्द इन खतरनाक बिजली व्यवस्थाओं की मरम्मत कराएं। खासकर, खुले तारों, झूलते कनेक्शनों और असुरक्षित ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने का कार्य एक माह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। इससे आने वाले महीनों में आगजनी और बिजली संबंधी हादसों को रोका जा सकेगा।
आमजन की मांग – जल्द हो सुधार
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इन खतरों को दूर किया जाए। लोगों का कहना है कि वे कई बार इस समस्या की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन विद्युत विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और विद्युत विभाग की होगी।
क्या प्रशासन अब भी जागेगा, या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी?

