समग्र स्वच्छता अभियान: रीवा जिले की हकीकत और चुनौतियां
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश 6 मार्च 2025
भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए देश के प्रधानमंत्री से लेकर स्थानीय सांसद तक व्यक्तिगत रूप से योगदान दे रहे हैं। हाल ही में, रीवा जिले के सांसद को सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान में भाग लेते हुए देखा गया। उन्होंने बिना किसी आधुनिक सफाई उपकरण के, स्वयं अपने हाथों से शौचालयों की सफाई कर, यह संदेश देने की कोशिश की कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
रीवा: स्वच्छता अभियान का यथार्थ
हालांकि, इस अभियान की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। जिले के कई बस स्टैंड, स्कूल परिसर और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। उदाहरण के लिए, गढ़ प्राथमिक पाठशाला, कटरा बस स्टैंड, पुराना जनपद पंचायत के सामने का क्षेत्र और मंगवा जैसी जगहों पर गंदगी आम नजारा बनी हुई है। सिरप और दवाइयों के खाली रैपर, पॉलिथीन, और अन्य कचरे से ये स्थान भरे पड़े हैं। कई बार यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं को इस अस्वच्छता के कारण भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यात्रा के दौरान किसी महिला को यदि शौचालय की आवश्यकता पड़े, तो उसे अक्सर उपयुक्त सुविधा नहीं मिलती। इससे यह सवाल उठता है कि स्वच्छता और सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है या वास्तव में इसे लागू भी किया जा रहा है?
गांवों में शौचालय निर्माण की वास्तविकता
सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। हर गांव में रिकॉर्ड के अनुसार 3 से 4 शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर है।
कई शौचालय सिर्फ शोपीस बने हुए हैं, जो उपयोग के लायक नहीं हैं।
कुछ शौचालय गिर चुके हैं या खस्ताहाल हो गए हैं।
अधिकांश शौचालयों में दरवाजे तक नहीं लगे हैं, जिससे उनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।
पानी की भारी कमी के कारण भी कई शौचालय अनुपयोगी हो गए हैं।
जो शौचालय अभी भी चालू हैं, वे अधिकतर निजी खर्चों से बनाए गए हैं, जबकि सरकारी शौचालयों का कोई अता-पता नहीं है।
क्या करें? कैसे करें?
यदि वास्तव में रीवा जिले को स्वच्छ और समृद्ध बनाना है, तो केवल फोटो खिंचवाने या सफाई के दिखावटी प्रयासों से कुछ नहीं होगा। कुछ ठोस कदम उठाने होंगे, जैसे:
1. स्थानीय प्रशासन को जवाबदेह बनाना – प्रत्येक पंचायत को अपने क्षेत्र में बने शौचालयों की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
2. सार्वजनिक भागीदारी – आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सफाई केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
3. ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू करना – बस स्टैंड, स्कूल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फेंकने के लिए उचित डस्टबिन की व्यवस्था होनी चाहिए।
4. शौचालयों का रखरखाव – गांवों और शहरों में सरकारी शौचालयों की नियमित सफाई और मरम्मत सुनिश्चित की जाए।
5. महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय – यात्रियों और खासकर महिलाओं के लिए उचित शौचालय व्यवस्था होनी चाहिए ताकि वे स्वच्छता से वंचित न रहें।
रीवा जिले में स्वच्छता अभियान को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब तक स्थानीय प्रशासन, सांसद, विधायक और जनता मिलकर इस अभियान को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक धरातल पर स्वच्छता एक सपना ही बनी रहेगी। स्वच्छता केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। अगर हम सभी इस अभियान को अपनी ज़िम्मेदारी समझें और ईमानदारी से अमल करें, तो निश्चित रूप से रीवा जिला "स्वच्छ और समृद्ध" बन सकता है।


