राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों की पटरियों पर अतिक्रमण: प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
रीवा/मऊगंज। राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर ग्रामीण अंचलों की सड़कों तक, हर जगह सड़क की पटरियों पर अतिक्रमण देखने को मिल रहा है। प्रशासन, नगर निगम, नगर पालिका और ग्राम पंचायतें इस ओर केवल वसूली तक ही सीमित हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। इस अनदेखी का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन दुर्घटनाओं के बाद ही सक्रिय होता है।
सड़क चलने के लिए या अतिक्रमण के लिए?
सड़कें वाहनों के सुचारू संचालन के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह व्यवस्था ध्वस्त होती नजर आ रही है। जगह-जगह सड़क की पटरियों पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे सड़कें संकरी हो गई हैं और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। कटरा, गढ़, गंगेव, देवतालाब, लालगांव, भटवा, हिनौती समेत कई महत्वपूर्ण मार्गों की हालत चिंताजनक है।
जनप्रतिनिधियों की बेरुखी
स्थानीय ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक और सांसद तक इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहे हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, कोई भी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहा। क्या जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल चुनाव तक ही सीमित रह गया है?
प्रशासन कब लेगा कड़ा निर्णय?
यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है। क्या केवल दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई होगी, या फिर समय रहते ठोस निर्णय लिया जाएगा? जनता की आवाज को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है। आगे जो भी स्थिति बनेगी, उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

