प्रेमानंद महाराज से सैनिकों की भेंट: राष्ट्र के रक्षक को संत की उपमा
प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से आज देश के वीर सैनिकों ने भेंट की, जहाँ उन्होंने सैनिकों को संत की उपमा देते हुए उनके अतुलनीय बलिदान और समर्पण की सराहना की। महाराज ने कहा कि सैनिक केवल सीमाओं की रक्षा करने वाले नहीं हैं, बल्कि वे सच्चे संत हैं, जो अपने परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को त्याग कर राष्ट्र की सेवा में तत्पर रहते हैं। उनका उद्देश्य न केवल भारत माता की रक्षा करना है, बल्कि हर नागरिक को सुरक्षित रखना भी है।
सैनिक: राष्ट्र की शान और सम्मान
महाराज ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि सैनिक हमारे राष्ट्र की शान और गौरव हैं। उन्होंने कहा, "यदि हमारे देश के सैनिक न हों, तो हम चैन की नींद नहीं सो सकते। वे हमारे राष्ट्र की सुरक्षा के अभिन्न स्तंभ हैं, जो हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। चाहे भीषण गर्मी हो, कड़ाके की ठंड हो या मूसलाधार बारिश, हमारे सैनिक 24 घंटे सीमाओं की सुरक्षा में डटे रहते हैं।"
उन्होंने कहा कि जब सैनिकों पर किसी प्रकार का संकट आता है, तो यह पूरे राष्ट्र के लिए दुखद होता है। देश का प्रत्येक नागरिक सैनिकों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करता है, क्योंकि उनके बलिदान के बिना देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान का आह्वान
महाराज प्रेमानंद जी ने इस अवसर पर सैनिकों के परिवारों के प्रति भी अपनी संवेदना और सम्मान प्रकट किया। उन्होंने कहा कि केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी राष्ट्र सेवा में योगदान देते हैं। जब एक सैनिक सरहद पर तैनात होता है, तब उसका परिवार उसकी अनुपस्थिति में हर कठिनाई का सामना करता है। ऐसे में समाज का दायित्व बनता है कि वह सैनिकों और उनके परिवारों को पूरा सहयोग और सम्मान प्रदान करे।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार सैनिकों और उनके परिवारों के साथ अन्याय होता है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग इस पर ध्यान नहीं देते। उन्होंने सरकार और समाज से अपील की कि सैनिकों को केवल युद्धकाल में ही नहीं, बल्कि हर समय उनका उचित मान-सम्मान मिलना चाहिए।
देश की सुरक्षा और एकता में सैनिकों की भूमिका
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में देश की सुरक्षा और एकता का भार पूरी तरह से सैनिकों के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि धर्म, संप्रदाय, जाति से ऊपर उठकर सैनिक राष्ट्र की रक्षा करते हैं। चाहे वे राज्य सरकार के अधीन हों या केंद्र सरकार के, उनका कर्तव्य एक ही होता है—राष्ट्र की रक्षा करना और तिरंगे की शान को बनाए रखना।
महाराज ने देशवासियों से आग्रह किया कि हर नागरिक को गर्व महसूस होना चाहिए कि हमारे बीच ऐसे वीर सपूत हैं, जो हर परिस्थिति में हमारी रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि हर गाँव, हर शहर, हर गली-मोहल्ले में सैनिकों का विशेष सम्मान होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी भी देश सेवा के लिए प्रेरित हो।
वीर सपूतों को नमन
अंत में प्रेमानंद महाराज ने वीर सैनिकों और उनके परिवारों को नमन करते हुए कहा, "धन्य हैं वे माताएँ जिन्होंने ऐसे सपूतों को जन्म दिया। हमारे सैनिकों का त्याग और समर्पण अतुलनीय है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनके योगदान को हमेशा याद रखें और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करें। "इस भेंटवार्ता ने वहाँ उपस्थित सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया और राष्ट्र प्रेम की भावना को और अधिक प्रबल किया।



