पंचायतों में जांच से बचने के लिए सेवा शुल्क, RTI कार्यकर्ताओं की भूमिका पर उठे सवाल
मऊगंज: भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए बनाए गए सूचना के अधिकार (RTI) कानून का उपयोग अब एक अलग ही दिशा में जा रहा है। जिले की कई पंचायतों में यह देखने में आ रहा है कि जांच से बचने के लिए हर महीने एक निश्चित राशि सेवा शुल्क के रूप में दी जा रही है। इस बीच, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और यूट्यूब पत्रकारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जो लगातार भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर कर रहे हैं, लेकिन उनकी आय के स्रोतों पर संदेह जताया जा रहा है।
पंचायतों में हर महीने तय सेवा शुल्क
नाम न छापने की शर्त पर कई लोगों ने बताया कि ब्लॉक की पंचायतों में आरटीआई कार्यकर्ताओं का भय बना हुआ है। ऐसा कहा जा रहा है कि पंचायतें अपनी जांच से बचने के लिए हर महीने एक निश्चित राशि का भुगतान कर रही हैं। विशेष रूप से वे पंचायतें जो जिले की सीमाओं से लगती हैं, इस प्रवृत्ति में सबसे आगे हैं।
कौन हैं ये लोग, जो हर महीने सेवा शुल्क प्राप्त कर रहे हैं?
अब यह जांच का विषय बन चुका है कि कौन-कौन लोग महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायत विभाग और सहकारिता विभाग से जुड़े लोगों से हर महीने सेवा शुल्क ले रहे हैं। क्या यह सब पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, या फिर यह एक नई तरह का भ्रष्टाचार बन चुका है?
RTI कार्यकर्ताओं की भूमिका पर उठे सवाल
समाज में RTI कार्यकर्ता भ्रष्टाचार उजागर करने और प्रशासन को जवाबदेह बनाने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन, कई सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूब पत्रकार जो इन मामलों को प्रमुखता से उठा रहे हैं, उनकी आय के स्रोतों पर संदेह पैदा हो रहा है। आखिर उनके पास इतना पैसा कहां से आ रहा है कि वे प्रतिदिन ₹500-₹2000 तक का खर्च डीजल, पेट्रोल और नाश्ते में कर सकते हैं?
प्रशासन को जांच करनी चाहिए
कुछ लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कार्य करने वाले ईमानदार पत्रकार और RTI कार्यकर्ताओं की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो RTI का उपयोग दबाव बनाने और अन्य निजी स्वार्थों के लिए कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह पूरी तरह निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाए कि कौन से लोग वास्तव में भ्रष्टाचार उजागर कर रहे हैं और कौन इसे अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
फिलहाल, इस मामले में कोई भी स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आए हैं, इसलिए किसी भी व्यक्ति विशेष का नाम प्रकाशित नहीं किया जा रहा है। लेकिन, यह मामला गंभीर है और प्रशासन को इसकी जांच कर सच्चाई को सामने लाना चाहिए।


