रिश्वतखोरी से त्रस्त फौजी की अनोखी पहल: सूटकेस में 5 लाख रुपये और गहने लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा, बोला – "अब एक बार में दे देता हूं रिश्वत"
रीवा (मध्य प्रदेश)।
रीवा जिले में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ एक पूर्व सैनिक की अनोखी लड़ाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। त्योंथर तहसील के रहने वाले पूर्व सैनिक योगेश तिवारी ने जनसुनवाई के दौरान ऐसा कदम उठाया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने एक सूटकेस में पांच लाख रुपये नकद और अपनी पत्नी के गहने भरकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर कहा – "अब बार-बार रिश्वत देने की बजाय एक बार में ही सब दे देता हूं, ताकि मेरी पुश्तैनी जमीन मुझे वापस मिल जाए।"
इस अभूतपूर्व घटना ने न सिर्फ कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मचा दिया, बल्कि सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है मामला?
पूर्व सैनिक योगेश तिवारी, जो मालपार गांव (त्योंथर) के निवासी हैं, ने बताया कि उनकी पुश्तैनी जमीन को गांव के ही एक दबंग व्यक्ति विद्याधर शुक्ला ने, जो कई आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है, तहसील कार्यालय के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से शासकीय घोषित करवा लिया है। इस जमीन को वापस पाने के लिए वे कई महीनों से तहसील कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन हर बार उनसे कुछ न कुछ राशि की मांग की जाती रही।
“पहले 10 हजार, फिर 20 हजार... हर बार एक नया बहाना और नई मांग। अब मेरी सहनशक्ति खत्म हो गई है। मैंने अपनी पत्नी के गहने, बैंक की जमा पूंजी, और घर की सारी नकदी इकट्ठा कर ली है। ये सब रिश्वत के नाम पर देने आया हूं, ताकि मुझे मेरी ही जमीन वापस मिल सके,” – योगेश तिवारी ने जनसुनवाई में अधिकारियों के सामने कहा।
जनसुनवाई में हड़कंप, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
जनसुनवाई के दौरान जैसे ही योगेश तिवारी ने सूटकेस खोलकर नकदी और गहने अधिकारियों के सामने रखे, वहां मौजूद सभी लोग चौंक गए। कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। मौके पर मौजूद अधिकारी भी असहज हो गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें योगेश तिवारी भावुक होकर अपनी व्यथा सुना रहे हैं और सिस्टम पर अपना भरोसा टूटने की बात कर रहे हैं।
"देश के लिए लड़ा, अब अपने हक के लिए लड़ रहा हूं"
योगेश तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने देश के लिए फौज में रहकर सेवा की है। सोचा था कि अपने देश में न्याय जरूर मिलेगा। लेकिन यहां तो न्याय भी बिकता है, और इंसाफ के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है। जब एक फौजी को ही इतना झुकना पड़ता है, तो आम आदमी का क्या हाल होता होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।”
प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना के सामने आने के बाद कलेक्टर रीवा ने तत्काल प्रभाव से मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं है, बल्कि एक पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है। यह घटना एक चेतावनी है कि यदि भ्रष्टाचार पर जल्द अंकुश नहीं लगाया गया, तो लोगों का व्यवस्था से विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
पूर्व सैनिक योगेश तिवारी की यह अनोखी पहल निश्चित रूप से व्यवस्था के खिलाफ एक साहसिक कदम है। यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश है – कि जब न्याय की उम्मीद मर जाती है, तब आम आदमी असाधारण कदम उठाने पर मजबूर हो जाता है।




