रीवा ब्रेकिंग: 501 बोरी संदिग्ध चावल से लदा ट्रक जब्त, जवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई
गरीबों के हक का अनाज अवैध रूप से भेजा जा रहा था—फूड विभाग और कलेक्टर को दी गई जानकारी, जांच में जुटा प्रशासन
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा, जवा से विशेष रिपोर्ट:
जिले में खाद्यान्न वितरण प्रणाली की पोल एक बार फिर खुलती नजर आ रही है। जवा पुलिस ने बीती रात नियमित गश्त के दौरान एक बड़े अवैध गतिविधि को बेनकाब किया है। पुलिस ने 501 बोरी चावल से लदा एक संदिग्ध ट्रक पकड़ा, जिसे बिना किसी अधिकृत दस्तावेज के ले जाया जा रहा था।
मौके पर मौजूद वाहन चालक से जब कागजात मांगे गए तो वह कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका। ट्रक में लदे चावल की मात्रा और स्थिति को देखते हुए पुलिस को शक हुआ कि यह चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों को वितरित किए जाने वाले राशन का हो सकता है।
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले संकेत
पुलिस ने ट्रक को तत्काल जवा थाने में खड़ा कर दिया और इसकी सूचना जिला कलेक्टर, खाद्य विभाग तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई। प्रारंभिक जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह चावल उचित मूल्य की दुकानों से चोरी कर अन्यत्र भेजा जा रहा था—संभवतः व्यापारिक लाभ के लिए।
जनता में आक्रोश, उठे कई सवाल
स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्हें अपने राशन कार्ड पर निर्धारित मात्रा में अनाज नहीं मिल रहा है।
कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि "जब अंगूठा लगवाने के बाद भी हफ्तों इंतजार करना पड़ता है, और फिर बताया जाता है कि आपके यूनिट के अनुसार केवल आधा राशन ही आया है, तो आखिर बाकी का अनाज कहां जा रहा है?"
भूतपूर्व घटनाएं भी आईं चर्चा में
यह घटना नई नहीं है। इससे पहले भी जिले में कई बार खाद्यान्न की चोरी या कालाबाजारी के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन आज तक किसी भी प्रकरण में निर्णायक कार्यवाही नहीं हो सकी। कई बार जांच शुरू होने के बाद फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं।
अधिकारियों की निष्क्रियता या मिलीभगत?
जनता के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या अधिकारी इस गोरखधंधे से अंजान हैं या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत का हिस्सा? भारत सरकार की ओर से मिलने वाला मुफ्त राशन गरीबों तक पहुंचे, इसके लिए व्यवस्था की गई थी, लेकिन अब यह व्यवस्था ही सवालों के घेरे में है।
आगे की कार्यवाही जारी, हो सकता है बड़ा खुलासा
फिलहाल, पुलिस व खाद्य विभाग की टीम द्वारा जब्त किए गए चावल के सैंपल, वाहन दस्तावेज और परिवहन से संबंधित जानकारियों की गहनता से जांच की जा रही है।
कलेक्टर द्वारा उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। यदि यह साबित होता है कि पकड़ा गया चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ा है, तो यह जिले में अब तक का सबसे बड़ा राशन घोटाला भी साबित हो सकता है।
इस प्रकरण ने न केवल प्रशासनिक सजगता की परीक्षा ली है, बल्कि एक बार फिर यह दिखा दिया है कि गरीबों के अधिकारों के साथ किस हद तक खिलवाड़ किया जा सकता है। अब देखना यह है कि क्या इस बार दोषियों पर कड़ी कार्यवाही होती है या यह मामला भी बीते मामलों की तरह दबा दिया जाएगा।



