अगर एक थानेदार को हटाने से मिलती है अमन-शांति, तो फिर देरी क्यों नईगढ़ी थाना प्रभारी के खिलाफ पत्रकारों का आमरण अनशन पहुंचा चौथे दिन में, प्रशासनिक तंत्र मौन
विशेष रिपोर्ट - विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मऊगंज मध्यप्रदेश
मऊगंज जिले के नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश ठाकुर के विरुद्ध स्थानीय पत्रकारों द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में दिया जा रहा आमरण अनशन गुरुवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया है। इस दौरान प्रशासन की ओर से समझाइश और अनशन समाप्त करने के लिए प्रयास किए गए, परंतु पत्रकार अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं।
गुरुवार को तहसीलदार सौरभ मरावी, मऊगंज थाना प्रभारी राजेश पटेल समेत प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने अनशनरत पत्रकार मिथिलेश त्रिपाठी और उनके सहयोगियों से लगभग 45 मिनट तक वार्ता की। लेकिन प्रशासनिक आग्रहों के बावजूद अनशनकारियों ने जूस तक ग्रहण करने से साफ इनकार कर दिया।
क्या है मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश ठाकुर ने कथित रूप से अभद्रता करते हुए पत्रकार मिथिलेश त्रिपाठी को मऊगंज कलेक्ट्रेट के पास से जबरन फिल्मी अंदाज में गिरफ्तार किया और थाने ले जाकर उनके साथ गाली-गलौज एवं मारपीट की। यह घटना दिनदहाड़े प्रशासनिक क्षेत्र के बीचोंबीच हुई, जिससे मीडिया जगत सहित आमजन में रोष व्याप्त हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने हस्तक्षेप कर पुलिस अधिकारियों से बात की, जिसके बाद पत्रकार को थाने से छोड़ा गया। हालांकि पत्रकार के साथ पुलिस द्वारा किए गए व्यवहार ने पत्रकार बिरादरी को झकझोर दिया। न्याय की आस में जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संवाद भी असफल रहा, तब पत्रकारों ने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया।
पत्रकारों की मुख्य मांगें:
1. नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश ठाकुर का तत्काल जिले से बाहर स्थानांतरण।
2. पत्रकार के विरुद्ध दर्ज कथित फर्जी प्रकरण की तत्काल वापसी।
प्रशासन का रवैया और राजनीतिक हस्तक्षेप के संकेत
चार दिनों से अनशन पर बैठे पत्रकारों की सुध लेने प्रशासन अब तक सिर्फ औपचारिकता निभाता नजर आया है। समझाइश का प्रयास किया गया, परंतु ठोस आश्वासन या कार्यवाही का कोई परिणाम सामने नहीं आया। सवाल यह उठता है कि यदि किसी एक अधिकारी को हटाने से जिले में अमन-शांति बहाल हो सकती है, तो प्रशासन निर्णय लेने में संकोच क्यों कर रहा है?
स्थानीय जनमानस और पत्रकारों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि थाना प्रभारी जगदीश ठाकुर को सत्ताधारी दल के एक प्रभावशाली नेता का संरक्षण प्राप्त है। पूर्व में भी ठाकुर का व्यवहार विवादों में रहा है। बावजूद इसके प्रशासन उनकी रक्षा में लगा हुआ प्रतीत होता है।
विधायक भी समर्थक, फिर भी समाधान अधूरा
मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल शुरू से ही पत्रकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। लेकिन अब तक पत्रकारों की मांगें पूरी न होना दर्शाता है कि या तो उनकी बातों को पर्याप्त वजन नहीं दिया जा रहा, या फिर जिला प्रशासन किसी अदृश्य दबाव में कार्य करने से बच रहा है।
लोकतंत्र पर लग रहे प्रश्नचिन्ह
पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाते हैं। यदि उन्हें ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए आमरण अनशन का सहारा लेना पड़े, तो यह पूरे तंत्र के लिए एक गहरी चिंता का विषय है। प्रशासन की निष्क्रियता से यह प्रतीत होता है कि वह जनता के बजाय पद और प्रभाव के सामने झुकता जा रहा है।
समय रहते निर्णय जरूरी
जिले की शांति व्यवस्था बनाए रखने और लोकतंत्र में विश्वास बहाल करने हेतु आवश्यक है कि जिला प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों पर सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करे। साथ ही, पत्रकारों की जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, जिससे जिले में व्याप्त असंतोष का समाधान हो सके।
यदि प्रशासन जल्द निर्णय नहीं लेता, तो यह मामला राज्य स्तर पर और अधिक तूल पकड़ सकता है। ऐसी स्थिति में न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आएगी, बल्कि जनता का व्यवस्था से विश्वास भी डगमगाएगा


