रीवा-मऊगंज में शराब कारोबारियों की दबंगई चरम पर नियम कानून ताक पर, शासन-प्रशासन मौन, जनता परेशान
विंध्य वसुंधरा संवाददाता | रीवा/मऊगंज |
मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2025 से शुरू हुई नई शराब दुकानों की व्यवस्था अब विवादों के घेरे में आ चुकी है। रीवा और मऊगंज जिलों में इन दुकानों पर जिस तरह से नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, उसने सरकार, प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शराब दुकानों पर खुली मनमानी, MRP से ऊपर वसूली
स्थानीय लोगों और वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, अधिकांश शराब दुकानों पर MRP से अधिक दरों पर शराब बेची जा रही है। उपभोक्ताओं से 20, 50 या 100 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कार्य आबकारी विभाग की जानकारी में होने के बावजूद, अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
शराब माफिया का नेटवर्क और सत्ता का संरक्षण
स्थानीय सूत्रों की मानें तो रीवा और मऊगंज में शराब के ठेके एक संगठित "गुट" द्वारा हथियाए गए हैं, जिनके आर्थिक स्रोत अत्यंत संदिग्ध हैं। 10-15 साल पहले जिनके पास खुद का व्यवसाय भी नहीं था, वे आज सैकड़ों करोड़ के शराब ठेके ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन ठेकों के संचालन में कई प्रभावशाली राजनैतिक परिवार और नौकरशाहों के रिश्तेदार भी शामिल हैं।
एक विशेष मामले में बताया गया है कि परिवहन विभाग से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति के परिजन आज मऊगंज और रीवा जिले में दर्जनों दुकानों का संचालन कर रहे हैं। यह व्यवस्था केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि सत्ता और धनबल के गठजोड़ की कहानी बयां करती है।
गांव-गांव तक शराब, गांजा और कोरेक्स की सप्लाई का नेटवर्क
शराब की दुकानों के माध्यम से अब न केवल शराब बल्कि गांजा और कोरेक्स जैसे नशीले पदार्थों की भी खुलेआम बिक्री की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्र बताते हैं कि मऊगंज के कुख्यात गांजा तस्कर सतीश जायसवाल को अब शराब ठेके के संचालन में भी साझेदार बनाया गया है। सतीश जायसवाल पर पूर्व में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और अब वह गांव-गांव तक नशे का नेटवर्क खड़ा कर रहा है।
नाबालिगों से शराब की बिक्री, प्रशासन ने आंखें मूंदी
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक नाबालिग बच्चा हनुमना की शराब दुकान पर शराब बेचता दिखा। यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि समाज के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। परंतु इस संवेदनशील मामले में भी प्रशासनिक चुप्पी बनी हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेगा।
प्रशासनिक सर्जरी विफल, शराब माफिया बेलगाम
प्रदेश में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल से आमजन को उम्मीद थी कि अब व्यवस्था में सुधार आएगा और माफिया तंत्र पर अंकुश लगेगा। परंतु वास्तविकता इसके ठीक उलट है – अब नशे का व्यापार और अधिक सुनियोजित तरीके से फलफूल रहा है।
जनचर्चा: अवैध वसूली का पैसा कहाँ जा रहा है?
स्थानीय लोगों की मानें तो शराब दुकानों पर जो अतिरिक्त रकम वसूली जा रही है, वह केवल सेल्समैन की जेब में नहीं जाती, बल्कि यह हिस्सा ऊपर तक पहुँचता है। यह भी चर्चा है कि अधिकारियों और कुछ सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों तक यह अवैध कमाई पहुँचती है। हालाँकि इस बात की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, परंतु प्रशासन का मौन रहना इस संदेह को और बल देता है।
जनता की माँग: हो निष्पक्ष जांच और सख्त कार्यवाही
विंध्य वसुंधरा समाचार यह स्पष्ट करता है कि वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि हमारे द्वारा नहीं की जाती, परंतु यदि ये वीडियो सही हैं तो संबंधित दोषियों पर तत्काल सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। और यदि ये वीडियो भ्रामक हैं, तो उन्हें वायरल करने वालों पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
अब आवश्यकता है कि:
अवैध वसूली करने वाली दुकानों के लाइसेंस तत्काल निरस्त किए जाएँ।
दुकानों में कार्यरत सभी सेल्समैन, सहायक और संबंधित व्यक्तियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
नाबालिगों से शराब बिक्री कराने वाले दुकानदारों पर FIR दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जाए।
गांजा और कोरेक्स जैसे अवैध नशे की बिक्री की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कारोबारियों पर आय स्रोत की जांच हो।
"नशा मुक्त भारत" और "जनकल्याण" जैसे राष्ट्रीय मिशनों को धता बताते हुए यदि स्थानीय स्तर पर ऐसी गतिविधियाँ निरंतर चलती रहीं, तो आने वाली पीढ़ियाँ भारी संकट में होंगी। प्रशासन को अब जन भावनाओं को समझते हुए कठोर निर्णय लेने होंगे, अन्यथा जनता का भरोसा तंत्र से उठ जाएगा।
विशेष रिपोर्ट , विंध्य वसुंधरा समाचार
सम्पर्क: vindhyavasundhara@samachar.in





