देश के लिए बलिदान हुआ मढ़ी खुर्द का वीर सपूत, आज हुआ अंतिम संस्कार
शहीद अजय विश्वकर्मा को नम आंखों और सैनिक सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, फूल मालाओं से किया गया स्वागत
रीवा @ विंध्य वसुंधरा समाचार
देश की रक्षा करते हुए रीवा जिले के ग्राम मढ़ी खुर्द निवासी वीर सपूत अजय विश्वकर्मा आज पंचतत्व में विलीन हो गए। भारतीय सेना की 119 असॉल्ट इंजीनियर रेजीमेंट में तैनात अजय सैन्य कार्रवाई के दौरान घायल हो गए थे, जिनका इलाज उत्तराखंड के रूड़की स्थित सैन्य अस्पताल में चल रहा था। 11 अप्रैल को उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।
शनिवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से उनके गृहग्राम मढ़ी खुर्द पहुंचा, गांव की जनता उमड़ पड़ी। गांववासियों ने पुष्पवर्षा कर और मालाओं से शहीद का स्वागत किया। "भारत माता की जय", "वीर अजय अमर रहें" जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। आंखें नम थीं लेकिन दिल में अपार गर्व।
शिक्षा से सेना तक का सफर, बचपन से ही था देशभक्ति का जुनून
शहीद अजय की प्रारंभिक शिक्षा गांव के शासकीय विद्यालय से हुई थी। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी उन्होंने मनगवां से पूरी की। स्कूल के शिक्षक रमेश तिवारी बताते हैं, “अजय पढ़ाई में तेज, व्यवहार में विनम्र और अनुशासनप्रिय छात्र था। वह बचपन से ही कहता था कि सेना में जाकर देश की सेवा करूंगा।”
उनका सपना 2015 में साकार हुआ जब वे सेना में भर्ती हुए। उन्होंने बेहद निष्ठा और परिश्रम से अपने कर्तव्यों का पालन किया। उनके बड़े भाई अमित विश्वकर्मा भी सेना में सेवारत हैं, और पिता रामबहोर विश्वकर्मा गांव में सामान्य कार्य करते हैं।
आज हुआ अंतिम संस्कार, सैन्य सम्मान के साथ दी गई विदाई
रविवार, 13 अप्रैल को शहीद अजय विश्वकर्मा का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना की विशेष टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया। सूबेदार सत्यानारायण शर्मा के नेतृत्व में सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ अपने साथी को अंतिम विदाई दी।
मित्रों और गांववालों की आंखें नम, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा
अजय के मित्र दीपक पटेल ने कहा, "अजय बचपन से ही साहसी और प्रेरणास्रोत रहा है। उसकी शहादत हम सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।" पूरे गांव ने एक सुर में कहा—“हमारे अजय ने जो किया है, वह अमर रहेगा।”
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने की घोषणा
अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन के अधिकारी, स्थानीय विधायक, जनपद सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने घोषणा की कि शहीद की स्मृति में गांव में स्मारक और उनके नाम पर विद्यालय का नाम रखा जाएगा।
शहीद अजय विश्वकर्मा अमर रहें!
"वो सोया नहीं, मातृभूमि की गोद में चिरनिद्रा में चला गया,
जिसने तिरंगे के लिए जीवन लुटा दिया।"






