पूर्व सांसद बुद्धसेन पटेल के खिलाफ रीवा न्यायालय में अधिवक्ताओं ने दायर किया परिवाद
गडरा हत्याकांड को लेकर दिए बयान पर मचा बवाल, ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत होने का आरोप
रीवा। मऊगंज जिले के गडरा गांव में होली के दिन हुए दोहरे हत्याकांड को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद रीवा संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद और गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक बुद्धसेन पटेल एक नए विवाद में घिर गए हैं। उनके खिलाफ अधिवक्ताओं द्वारा रीवा की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत में आपराधिक परिवाद प्रस्तुत किया गया है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब दिल्ली में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बुद्धसेन पटेल ने गडरा हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कथित तौर पर ब्राह्मण समाज के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि यह बयान न केवल जातिगत दुर्भावना से प्रेरित था, बल्कि समाज के एक विशेष वर्ग के प्रति घृणा और हिंसा को उकसाने वाला भी था।
न्यायालय का संज्ञान, थाने को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश
इस मामले में एडवोकेट मानवेंद्र द्विवेदी और एडवोकेट अनंत मिश्रा द्वारा परिवाद पत्र प्रस्तुत किया गया, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 223 एवं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएनएस) की धाराओं 196, 197 व 353 के अंतर्गत दायर किया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री पन्ना नागेश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी, सिविल लाइंस रीवा को 17 अप्रैल 2025 तक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप
परिवादकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने पहले 24 मार्च 2025 को सिविल लाइंस थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 26 मार्च को पुलिस अधीक्षक रीवा को ज्ञापन सौंपा गया। लेकिन पुलिस प्रशासन द्वारा अब तक कोई विधिक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे आक्रोशित होकर उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
सोशल मीडिया पर भी प्रचारित किया गया बयान
अधिवक्ताओं का यह भी आरोप है कि पूर्व सांसद बुद्धसेन पटेल द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान को सोशल मीडिया के माध्यम से जानबूझकर फैलाया गया, जिससे समाज में वैमनस्य और जातिगत विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उनका कहना है कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह के बयान देना लोकतांत्रिक और सामाजिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।
ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा पर हमला: अधिवक्ता
परिवादकर्ताओं के अनुसार, बुद्धसेन पटेल का यह बयान ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा पर सीधा प्रहार है, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। यदि समय रहते ऐसे बयानों पर अंकुश न लगाया गया तो समाज में तनाव और हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि थाना सिविल लाइंस न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए क्या प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है और न्यायालय इस पर किस प्रकार की कार्रवाई करता है। इस मामले ने न केवल रीवा बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है।

