गढ़ थाना क्षेत्र की कंपोजिट शराब दुकान बनी मनमानी का अड्डा, देर रात तक खुलेआम बिक रही शराब — प्रशासन मौन
(विंध्य वसुंधरा समाचार) गढ़ रीवा मध्यप्रदेश
गढ़ थाना अंतर्गत संचालित कंपोजिट शराब दुकान में आबकारी नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। ठेकेदार आर.डी. ट्रेडर्स द्वारा संचालित यह दुकान न केवल निर्धारित समय सीमा के बाद शराब बेच रही है, बल्कि ग्राहकों के अधिकारों का भी घोर उल्लंघन कर रही है।
कानून की धज्जियां: देर रात तक शराब बिक्री जारी
प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार, शराब दुकानों को प्रातः 9 बजे से रात्रि 11:30 बजे तक संचालित करना अनिवार्य है। किंतु गढ़ क्षेत्र की यह दुकान रात्रि 12 बजे के बाद भी गुपचुप तरीके से शराब बेच रही है। वायरल वीडियो में यह स्पष्ट देखा जा सकता है कि दुकान की दीवार में छेद कर शराब की बोतल निकालने की व्यवस्था की गई है, और शटर के नीचे से अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है।
स्थानीय नागरिकों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो व फोटो इस बात की पुष्टि करते हैं कि दुकान देर रात तक संचालित रहती है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और आबकारी विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
सेल्समेन का अभद्र व्यवहार, रेट लिस्ट व बिल देने से इनकार
ग्राहकों के अनुसार, जब उन्होंने रेट सूची और बिल की मांग की तो वहाँ मौजूद सेल्समेन ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि धमकाने की भी कोशिश की। यह स्पष्ट रूप से आबकारी नीति 2025 का उल्लंघन है, जिसके तहत POS मशीन से बिलिंग और रेट लिस्ट का प्रदर्शन अनिवार्य है।
लाइसेंस की आड़ में खुलेआम मनमानी — प्रशासन क्यों मौन?
शराब दुकान को जारी लाइसेंस में संचालन समय, मूल्य निर्धारण, बिलिंग प्रक्रिया और ग्राहक संतोष जैसे नियम स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। बावजूद इसके, गढ़ की यह दुकान इन नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रही है।
प्रश्न यह है कि क्या ये नियम केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित हैं? और यदि नहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी किस ओर संकेत कर रही है?
गाँव-गाँव में अवैध पैकारी, विभाग बना मूक दर्शक
सूत्रों के अनुसार, उक्त दुकान से आसपास के गाँवों—लोरी, बाबूपुर, डागरडुआ, पड़ुआ, रामगढ़, अगड़ाल आदि में अवैध शराब की पैकारी करवाई जा रही है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी मौन हैं। यह स्थिति या तो गहरी निष्क्रियता को दर्शाती है या किसी संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
पूर्व में दर्ज हुई शिकायतें भी रहीं अनसुनी
कुछ दिन पूर्व ग्राहकों ने शराब की अधिक कीमत वसूली के विरोध में वीडियो बनाकर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायतें केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं।
रीवा-मऊगंज में भी फैला है ऐसा ही नेटवर्क
गढ़ की यह स्थिति अपवाद नहीं है। रीवा और मऊगंज जिलों की अन्य कंपोजिट शराब दुकानों में भी एमआरपी से अधिक मूल्य पर बिक्री की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जो एक संगठित अवैध व्यापार की ओर इशारा करती हैं।
अब सवाल यह — कार्रवाई कब?
स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की निष्क्रियता से आमजन में रोष व्याप्त है। नियमों की खुली धज्जियों के बीच जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कार्रवाई कब होगी?




