रीवा-मऊगंज: चिकित्सा के नाम पर मौत का बाजार! 3500 से अधिक फर्जी डॉक्टर, अपाहिज होती व्यवस्था – क्या नींद में है शासन-प्रशासन?
विशेष रिपोर्ट | 'विंध्य वसुंधरा समाचार' रीवा मऊगंज मध्यप्रदेश
मध्य प्रदेश के रीवा और मऊगंज जिले इन दिनों एक भयावह सत्य के केंद्र में हैं—यहां "चिकित्सा" अब समाजसेवा नहीं, एक संगठित अपराध बन चुकी है।
जहां सरकार रीवा को "मेडिकल हब" के रूप में प्रचारित कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि 3500 से अधिक अवैध चिकित्सक दो जिलों में खुलेआम मरीजों की जान से खेल रहे हैं।
"डिग्री" नकली, "इलाज" जानलेवा
इन झोला छाप डॉक्टरों के पास न डिग्री है, न अनुभव, न ही दायित्व का बोध। दंत चिकित्सक हार्ट और किडनी का इलाज कर रहे हैं। पैथोलॉजी में बिना मर्ज के मर्ज बताया जा रहा है और दवाओं के नाम पर ज़हर परोसा जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं से धोखा, भ्रूण हत्या तक मजबूर
रीवा के कई मामले प्रकाश में आए हैं जहाँ गर्भवती महिलाओं को झूठी रिपोर्ट देकर गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। यह न केवल चिकित्सा पद्धति की हत्या है, बल्कि मानवाधिकारों का खुलेआम अपमान है।
कौन जिम्मेदार?
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री स्वयं इसी क्षेत्र से आते हैं, और फिर भी हालात इतने बदतर हैं?
क्या यह लापरवाही है या साजिशन चुप्पी?
"मेडिकल हब" या "मेडिकल माफिया का गढ़"?
रीवा को मेडिकल हब बनाने की बात की जाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि मरीज इलाज के लिए नागपुर, बनारस और प्रयागराज की ओर भाग रहे हैं।
सवाल उठता है—अगर रीवा इलाज में सक्षम है, तो हर बस में क्यों भर-भरकर मरीज दूसरे शहर भेजे जा रहे हैं?
प्रशासन की चुप्पी = स्वीकृति?
प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल हैं। हर थाना, हर स्वास्थ्य केंद्र, हर मेडिकल स्टोर पर अवैध डॉक्टरों की उपस्थिति—क्या ये सब बिना प्रशासन की जानकारी के संभव है?
क्या अधिकारी सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में व्यस्त हैं?
भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं
पुलिस विभाग में नियुक्तियाँ जनप्रतिनिधियों के इशारों पर
आबकारी और खनिज विभाग में बाहरी राज्यों के माफिया सक्रिय
स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से शिथिल
रीवा अब बिहार और बंगाल को भी अपराध के आंकड़ों में पछाड़ रहा है। अगर यही स्थिति रही, तो रीवा एक दिन राज्य की सबसे असुरक्षित और अस्वस्थ जिला कहलाएगा।
जनता पूछ रही है—
1. क्या जनप्रतिनिधि रीवा की दुर्दशा के लिए जवाब देंगे?
2. स्वास्थ्य मंत्री किस "मॉडल" की बात कर रहे हैं, जब उनके ही जिले में मौत के सौदागर सक्रिय हैं?
3. क्या प्रशासन सो रहा है, या जानबूझकर आँख मूंदे है?
अब बहुत हो चुका!
रीवा की जनता अब सिर्फ चुनावी वादों से नहीं, जवाबदेही चाहती है।
अभी नहीं तो कब? आज नहीं तो फिर कब जागेगा सिस्टम?






