विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति विवादों में घिरे, बयान पर मचा सियासी घमासान
वन मंत्री विजय शाह और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के बाद एक और भाजपा नेता के बयान पर बवाल
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा, मध्यप्रदेश।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा देशभर में निकाली जा रही तिरंगा यात्रा के तहत रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि "अगर अमेरिका की ओर से सीजफायर का आदेश नहीं आता, तो भारतीय सेना पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर देती।"
यह बयान अब विवादों की जद में आ गया है। विपक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया है कि क्या भारत की सैन्य कार्रवाईयों पर अमेरिका निर्णय लेता है? इस बयान को अब मध्यप्रदेश के वन मंत्री विजय शाह और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पूर्व में दिए गए विवादित बयानों की कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। परिणामस्वरूप विधायक प्रजापति अचानक मीडिया की सुर्खियों में आ गए हैं।
विधायक ने दी सफाई
विवाद बढ़ता देख विधायक नरेंद्र प्रजापति ने मीडिया से बातचीत में अपने बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मेरे कहने का आशय यह था कि हमारी सेनाओं की कार्रवाई इतनी प्रभावी थी कि पाकिस्तान को घुटनों पर आना पड़ा और अंततः उन्होंने युद्धविराम की गुहार लगाई। अमेरिका का नाम फ्लो में आ गया, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हमारी सेनाएं किसी विदेशी आदेश पर काम करती हैं।"
विधायक ने आगे स्पष्ट किया कि तिरंगा यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई सैन्य सफलता—ऑपरेशन सिंदूर—के सम्मान में निकाली गई थी। उन्होंने दावा किया कि इस ऑपरेशन में भारत की तीनों सेनाओं ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया और कई खूंखार आतंकियों को मार गिराया।
विपक्ष पर निशाना
प्रजापति ने आरोप लगाया कि "सरकार की सफलता से बौखलाए विपक्षी दल अब तिल का ताड़ बना रहे हैं। वे जानबूझकर देशभक्तिपूर्ण भावनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं ताकि देशवासियों को भ्रमित किया जा सके।" उन्होंने कहा कि "ऐसे संवेदनशील विषयों पर झूठ फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह देश की सेना के शौर्य के अपमान के बराबर है।"
इस बयान ने राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं और आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। अब देखना यह है कि भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और विपक्ष इसे कितना बड़ा मुद्दा बनाता है।


