रीवा-मऊगंज में गेहूं खरीदी 50% के नीचे रहने की आशंका, किसान योजना से अनजान
रीवा/मऊगंज। इस बार गेहूं खरीदी केंद्रों में किसानों की भागीदारी में अत्यधिक कमी देखने को मिल रही है। सरकारी योजना के तहत गेहूं खरीदी में किसानों को सहभागी बनाने के लिए पंजीयन प्रक्रिया की शुरुआत तो की गई थी, लेकिन जागरूकता की कमी और संबंधित प्रक्रियाओं में बाधाएं किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनीं। यही कारण है कि राज्य के अधिकांश जिलों में खरीदी लक्ष्य पूरा होने की संभावना 50% से भी कम रह गई है।
गेहूं खरीदी पंजीयन प्रक्रिया और समयसीमा
कृषि विभाग ने गेहूं खरीदी के लिए 20 जनवरी 2025 से पंजीयन प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें किसानों को अपने नाम और भूमि विवरण पंजीकृत करने के लिए ऑनलाइन पंजीयन कराना था। पंजीयन की अंतिम तिथि 9 अप्रैल 2025 निर्धारित की गई थी, ताकि किसानों को समय पर खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिल सके।
15 मार्च 2025 से गेहूं की खरीदी प्रक्रिया शुरू हुई थी और तब से पंजीयन और खरीदी की दोनों प्रक्रियाएं साथ-साथ चल रही थीं, लेकिन जिन किसानों ने पंजीयन नहीं कराया था, वे खरीदी में भाग नहीं ले पा रहे थे। इसके अलावा राजस्व विभाग द्वारा भूमि सत्यापन और गिरदावली का कार्य भी प्रारंभ हुआ, जिससे किसानों को कई कागजी कार्यों में उलझने के कारण खरीदी प्रक्रिया में देरी हो रही थी।
स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया में अड़चनें
खरीदी केंद्रों पर गेहूं की बिक्री के लिए किसानों को पहले स्लॉट बुकिंग करनी थी। इसके लिए 28 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 तक का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण किसानों को इस प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं मिल पाई। जैसे ही किसानों को यह जानकारी मिली, तब तक स्लॉट बुकिंग का कार्य बंद हो चुका था। अब केवल खाद्य शाखा कलेक्ट्रेट से संबंधित बैंकिंग कार्य जारी है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन गया है।
व्यापारियों द्वारा अधिक मूल्य पर गेहूं की खरीदारी
सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली ही समस्या नहीं रही, बल्कि व्यापारी भी किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक राशि देने का लुभावना प्रस्ताव लेकर आ गए। सरकारी दर 2600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है, लेकिन व्यापारी 2400 रुपये नकद देने के साथ-साथ ट्रैक्टरों से परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे थे। इससे किसान व्यापारियों के पास अधिक गेहूं बेचने के लिए प्रेरित हो रहे हैं, क्योंकि उनके लिए यह आर्थिक दृष्टि से अधिक लाभकारी था।
खरीदी में कमी और 50% लक्ष्य तक पहुंचने की संभावना
अब तक की स्थिति को देखते हुए रीवा और मऊगंज जिलों में अनुमान है कि कुल गेहूं खरीदी का लक्ष्य 50% से भी कम पूरा होगा। 90% किसानों के नाम व्यापारियों द्वारा खरीदी नहीं की गई, और ऐसे में सरकारी खरीदी केंद्रों पर गेहूं का संग्रहण भी बहुत कम होगा। प्रशासन ने इसे एक बड़ी चुनौती के रूप में लिया है, क्योंकि इस वर्ष किसान जागरूकता की कमी के कारण सरकार के प्रयासों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सका है।
जागरूकता अभियान की जरूरत
किसानों को सही समय पर गेहूं बेचने का लाभ देने के लिए प्रशासन को चाहिए कि वे जल्द से जल्द जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि आगामी समय में अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को पंजीयन और स्लॉट बुकिंग जैसी प्रक्रियाओं के बारे में समय पर जानकारी मिले, ताकि वे अपनी उपज को सरकारी दर पर बेच सकें और उनका गेहूं व्यापारियों के पास न जाए।
इस वर्ष की गेहूं खरीदी में सरकारी केंद्रों के मुकाबले व्यापारियों की बड़ी भूमिका देखने को मिली है, जो किसानों को अधिक राशि और सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। हालांकि, यदि प्रशासन ने किसानों के लिए जागरूकता बढ़ाने के ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में खरीदी प्रक्रिया पर और भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।



