कार्यपालन यंत्री टी.पी. गुर्दवान का सनसनीखेज वीडियो वायरल, विधायक की शिकायत पर उपयंत्री को बचाने के किए खुलासे — भ्रष्टाचार, फर्जी डिग्री और दस्तावेजों में हेराफेरी के गंभीर आरोप
रीवा, 25 मई 2025
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के कार्यपालन यंत्री तीरथ प्रसाद गुर्दवान एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार उन्होंने खुद को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक 1 मिनट 41 सेकंड के वीडियो में गुर्दवान स्पष्ट रूप से यह स्वीकार करते नजर आ रहे हैं कि उन्होंने सेमरिया विधायक अभय मिश्रा की शिकायत के बावजूद उपयंत्री अनित राज सिंह को सस्पेंशन से बचाने के लिए बैक डेट में निर्माण पुस्तिकाओं (CC/MB) में हेराफेरी की और जांच रिपोर्ट को भी मनमुताबिक बदलवा दिया।
वीडियो में गुर्दवान के कबूलनामे से हड़कंप वीडियो में गुर्दवान कहते सुने जा सकते हैं:
"मैंने उपयंत्री अनित राज को कई बार बचाया है। विधायक अभय मिश्रा की शिकायत पर भी मैंने उसकी फाइल में बैक डेट में सुधार किया और जांच प्रतिवेदन बदलवा कर उसे सस्पेंड होने से बचाया। मैं नहीं चाहता था कि मेरी कलम से उसकी नौकरी चली जाए।"
इस कथन से न केवल उनकी कार्यशैली पर बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
सेवा निवृत्त होने से पहले ही उजागर हुआ 'सेवा का सच'
टी.पी. गुर्दवान जून 2025 में सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन रिटायरमेंट से ठीक पहले उनका यह वायरल बयान यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान प्रभावशाली अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में कई भ्रष्टाचार के मामलों में लीपापोती की। यह स्वीकारोक्ति अपने आप में एक गंभीर मामला है, जो विधानसभा प्रश्नों, विभागीय जांच और यहां तक कि न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करता है।
फर्जी डिग्रियों का भी खुलासा: जांच में दोष सिद्ध
टीपी गुर्दवान के खिलाफ पहले से ही शैक्षणिक योग्यता में फर्जीवाड़े के आरोप हैं। रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद द्वारा कराई गई जांच में गुर्दवान की AMIE (सिविल इंजीनियरिंग) और MA (समाजशास्त्र) की डिग्रियों को फर्जी और अमान्य पाया गया है। यह रिपोर्ट प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती दीपाली रस्तोगी को भेज दी गई है, जिससे जल्द ही उच्च स्तरीय कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
फाइलें दबाई गईं, कार्रवाई टाली गई
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी ने टीपी गुर्दवान के विरुद्ध कार्रवाई का अभिमत तीन माह पहले ही कमिश्नर रीवा संभाग को भेज दिया था। इसके बावजूद कार्यवाही की फाइलें कार्यालय में दबा दी गईं। अब यह फाइल प्रमुख सचिव स्तर पर भेजी गई है, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या जानबूझकर कार्यवाही को रोका गया?
सूत्रों का यह भी कहना है कि रीवा संभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी गुर्दवान को बचाने की कोशिशों में लगे रहे, जिससे पूरा मामला गड़बड़झाले की तरफ इशारा करता है।
एफआईआर दर्ज करने और विभागीय जांच की मांग तेज
प्रशासनिक विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का मानना है कि जिस प्रकार से गुर्दवान ने सार्वजनिक रूप से हेराफेरी, कूटरचना, और दस्तावेजों में बदलाव के दावे किए हैं, यह आपराधिक मामला बनता है।
एफआईआर दर्ज कर, तत्काल प्रभाव से निलंबन और विभागीय जांच की मांग ज़ोर पकड़ रही है। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रदेश सरकार और पंचायत विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति पर सीधा प्रहार होगा।
अब क्या करेंगे कमिश्नर बीएस जामोद?
अब निगाहें रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद पर टिकी हैं कि वे इस खुले कबूलनामे के बाद गुर्दवान पर कठोर कार्रवाई करते हैं या फिर मामला एक बार फिर फाइलों में दफन हो जाएगा।
प्रश्न यह नहीं है कि एक उपयंत्री को क्यों बचाया गया, बल्कि प्रश्न यह है कि क्या एक कार्यपालन यंत्री को यह अधिकार है कि वह जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को दरकिनार कर, अपने विवेक से कानून का उल्लंघन करे?
यह मामला न केवल एक अधिकारी की करतूत का है, बल्कि पूरे तंत्र की सोच, संरचना और साख पर सवाल उठाता है। अब देखना यह है कि सरकार और विभाग इस पर कितना गंभीर रुख अपनाते हैं।




