जांच में दोष सिद्ध, फिर भी बचा कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान! कमिश्नर कार्यालय में दब गई फाइल, सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल
रीवा, म.प्र. | दिनांक: 10 मई 2025 | विशेष रिपोर्ट विंध्य वसुंधरा समाचार
रीवा संभाग की ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) में पदस्थ कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान के खिलाफ फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर पदोन्नति और शासनादेशों की अवहेलना के गंभीर आरोपों की जांच में उन्हें दोषी पाया गया है। अधीक्षण यंत्री (SE) द्वारा कमिश्नर को भेजा गया स्पष्ट अभिमत एक माह से अधिक समय से लंबित है, किंतु अब तक न तो निलंबन हुआ, न ही आपराधिक कार्यवाही के आदेश दिए गए।
प्रकरण में प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि "पूरा तंत्र भ्रष्टाचार के संरक्षण में लगा हुआ है, और दोषी अफसर के खिलाफ जानबूझकर कार्रवाई नहीं की जा रही।"
जांच में खुला बड़ा फर्जीवाड़ा: बिना अनुमति मिली डिग्रियाँ, प्रमोशन भी हुआ!
टीपी गुर्दवान पर आरोप है कि उन्होंने शासन की पूर्व अनुमति के बिना AMIE (सिविल इंजीनियरिंग) की डिग्री प्राप्त की और इसी के आधार पर उपयंत्री से सहायक यंत्री पद पर पदोन्नति हासिल की। यही नहीं, उन्होंने एम.ए. (समाजशास्त्र) की डिग्री भी बिना स्वीकृति के प्राप्त कर उसे शासकीय सेवा पुस्तिका में इन्द्राज कराया।
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 16 के अनुसार, किसी शासकीय सेवक को शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने हेतु किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने से पहले शासन की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है। मगर गुर्दवान ने न केवल नियमों की अनदेखी की, बल्कि एमए की डिग्री को सेवा पुस्तिका के पहले पृष्ठ पर दर्ज करवा कर शासनादेश की घोर अवहेलना की।
एसई अतुल चतुर्वेदी की रिपोर्ट में क्या लिखा है?
अधीक्षण यंत्री अतुल चतुर्वेदी ने अपने अभिमत में कहा है कि—
“टीपी गुर्दवान द्वारा बार-बार पत्रों और सूचना पत्रों के बावजूद भी शैक्षणिक दस्तावेज़ समयसीमा में प्रस्तुत नहीं किए गए। बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के डिग्री प्राप्त करना और उन्हें सेवा अभिलेखों में दर्शाना शासन के आदेशों की अवहेलना है। यह कदाचरण और स्वेच्छाचारिता है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि—
विकास आयुक्त ही ऐसे मामलों में अनुमति प्रदान करने के सक्षम अधिकारी हैं,
बिना अनुमति ली गई डिग्रियाँ शासनादेशों की अवहेलना के अंतर्गत आती हैं,
यह स्पष्ट रूप से सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला है।
एसई ने अपनी संस्तुति के साथ पूरी रिपोर्ट कमिश्नर रीवा को अग्रिम कार्यवाही हेतु भेज दी है।
कमिश्नर कार्यालय में ठहरी फाइल: कार्रवाई का इंतज़ार करता न्याय
प्रश्न यह उठता है कि जब जांच पूरी हो चुकी है, दोष सिद्ध हो चुका है, और अधीक्षण यंत्री का अभिमत भी कमिश्नर को भेजा जा चुका है, तो फिर अब तक टीपी गुर्दवान के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
सूत्रों के अनुसार, टीपी गुर्दवान जून 2025 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मामले को जानबूझकर विलंबित किया जा रहा है ताकि वह सेवा से रिटायर होकर सारी कार्यवाही से बच सकें।
कमिश्नर के पास हैं ये शक्तियाँ, फिर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
मध्यप्रदेश शासन के अंतर्गत कमिश्नर संभाग को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त हैं:
दोष सिद्ध पाए गए अधिकारी को प्रत्यक्ष निलंबित करने की शक्ति,
संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी करने की शक्ति,
पदावनति की संस्तुति व अधिक भुगतान की वसूली हेतु विकास आयुक्त को प्रस्ताव भेजने का अधिकार।
इसके बावजूद कार्रवाई न होना पूरे तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
शिवानंद द्विवेदी की सीधी मांग: पदावनति, वसूली और FIR
आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस घोटाले को उजागर किया और अब तक चार स्मरण पत्र मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, पंचायत विभाग, कमिश्नर रीवा समेत सभी उच्च अधिकारियों को भेज चुके हैं।
उन्होंने अपनी मांगों में स्पष्ट कहा है—
टीपी गुर्दवान को तत्काल कार्यपालन यंत्री के प्रभार से हटाया जाए,
उन्हें उपयंत्री के मूल पद पर पदावनत किया जाए,
अब तक सहायक यंत्री के रूप में प्राप्त समस्त वेतन की वसूली की जाए,
झूठे दस्तावेज़, जालसाजी, कूटरचना के लिए एफआईआर दर्ज की जाए,
उन्हें निलंबित एवं बर्खास्त किया जाए।
वायरल वीडियो से और गहराया संदेह: “सब बिकता है...”
टीपी गुर्दवान का एक वायरल वीडियो भी सामने आया है जिसमें वह कथित रूप से कहते सुने जा सकते हैं—
“नीचे से ऊपर तक सब बिकता है, शिकायत का मतलब बस ऊपर तक पैसा पहुँचाना है।”
यह वीडियो अब प्रशासन की निष्क्रियता के संदर्भ में और अधिक सनसनीखेज हो गया है।
अब क्या होगी अगली कार्रवाई?
क्या दोष सिद्ध अधिकारी सेवा से रिटायर होकर बच निकलेगा?
क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से विमुख होकर भ्रष्टाचार को संरक्षण देगा? या कमिश्नर रीवा संभाग जनहित, प्रशासनिक ईमानदारी और संविधानिक दायित्वों का पालन करते हुए दोषी के खिलाफ सख्त कार्यवाही करेंगे? यह सब अब समय पर निर्भर करता है।




