रीवा में अवैध कॉलोनी निर्माण करने वालों पर शिकंजा: सिटी कोतवाली में 14 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज
रीवा शहर में वर्षों से फल-फूल रहे अवैध कॉलोनी कारोबार पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया है। शहर के बहुमूल्य शहरी भूखंडों को गरीबों को 'सपनों का घर' दिखाकर बेचे जाने की प्रवृत्ति के खिलाफ अब प्रशासन और पुलिस दोनों सक्रिय हो चुके हैं। सिटी कोतवाली पुलिस ने ऐसे 14 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर बड़ी कार्रवाई की है। यह कार्रवाई नगर निगम की रिपोर्ट और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है।
कई सालों से चल रही थी मुहिम
इस पूरे मामले में अधिवक्ता बीके माला की वर्षों की कानूनी लड़ाई रंग लाई है। उन्होंने लगातार इस मुद्दे को प्रशासन के समक्ष उठाया था, जिसमें अब कार्रवाई के रूप में बड़ी सफलता मिली है। नगर निगम की जांच रिपोर्ट और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 6 अलग-अलग मामलों में अपराध पंजीबद्ध किए हैं।
इन धाराओं में हुई कार्रवाई
थाना प्रभारी अरविंद सिंह राठौर ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम की धारा 292(सी) के तहत केस दर्ज किया गया है। यह धारा अनाधिकृत रूप से कॉलोनी बसाने और जमीनों के व्यावसायिक दुरुपयोग से संबंधित है। आरोपी बिना वैध स्वीकृति और नक्शे के प्लॉटिंग कर नागरिकों से भारी धनराशि वसूल रहे थे।
ये हैं नामजद आरोपी
पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में जिन 14 लोगों के नाम शामिल हैं, वे इस प्रकार हैं:
अनूप तिवारी, पिता अरुण कुमार, निवासी निपनिया
अनस एवं मोहम्मद आलमीन
दीपक गुप्ता, पिता पवन गुप्ता
अजय कुमार गुप्ता, पिता बिहारी लाल, निवासी निपनिया
तौसीफ अहमद उर्फ रेषि, पिता मोहम्मद हनीफ, मालिक विंड ग्रुप, निवासी निपनिया
सियाशरण कुशवाहा, रामशरण कुशवाहा एवं लक्ष्मण कुशवाहा, तीनों पुत्र बृजवासी, निवासी निपनिया
मेतीराम, पिता परधान
विवेक गुप्ता, पिता गुलाब चंद्र
गायत्री साहू, पति ओमकार
रेशमा साहू, पति प्रदीप
विवेक सोनी, पिता जगदीश सोनी, निवासी फोर्ट रोड
इनमें से दो महिलाएं भी कॉलोनी प्रकरण में सक्रिय भूमिका में पाई गई हैं।
सक्रिय थे बिचौलिए और निजी बिल्डर
पुलिस सूत्रों के अनुसार अवैध कॉलोनी बसाने का यह पूरा नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था, जिसमें बिचौलिए, छोटे-मोटे बिल्डर और जमीन दलाल मिलकर काम कर रहे थे। बिना अनुमति प्लॉटिंग कर लोगों को लुभावने ऑफर देकर जमीनें बेची जा रही थीं। नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं की गारंटी दिए बिना इस प्रकार का व्यवसायिक फायदा उठाया जा रहा था।
क्या कहते हैं कानूनविद
इस पूरे प्रकरण को लेकर अधिवक्ता बीके माला ने कहा कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। “अब समय आ गया है कि शहर की मास्टर प्लान नीति के खिलाफ जाकर कॉलोनी बसाने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि आगे इस तरह के कार्यों पर अंकुश लग सके।”
रीवा में अवैध कॉलोनी निर्माण के खिलाफ दर्ज की गई यह एफआईआर प्रशासनिक सख्ती का संकेत है। आने वाले दिनों में ऐसी और भी कार्रवाइयों की उम्मीद की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब शहरी विकास के नाम पर अवैध मुनाफाखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


